तेरे ज़ख्म को सीने से लगाए, इस ज़माने में जीने की कोशिश कर रहें हैं।
- तेरी यादें जो जहर बन गई हैं उसे दिल से निकलकर पीने की कोशिश कर रहें है
तेरे ज़ख्म को सीने से लगाए, इस ज़माने में जीने की कोशिश कर रहें हैं।
ਮੈਂ ਤੁਰਦਾ ਰਿਹਾ ਆਪਣੇ ਰਾਹਾਂ ਤੇ,
ਥੋੜਾ ਅੱਗੇ ਗਿਆ ਲੋਕ ਬਹੁਤ,
ਮਿਲੇ ਮੈਨੂੰ ਆਪਣੇ ਰਾਹਾਂ ਤੇ,
ਭੀੜ ਵਿੱਚ ਵੀ ਇੱਕ ਭਾਲ ਸੀ,
ਉਹਦੀ ਇੱਕਲੈ ਦੀ ਆਪਣੇ ਰਾਹਾਂ ਤੇ,
ਅੱਗੇ ਗਿਆ ਉਹਦਾ ਚੁੰਨੀ ਦਾ ਰੰਗ ਦੇਖਿਆ,
ਖੁਸ਼ ਹੋਇਆ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਰਾਹਾਂ ਤੇ,
ਗੈਰਾਂ ਦੇ ਹੱਥ ਚ ਹੱਥ ਸੀ ਉਹਦਾ,
ਦੇਖ ਗਿਰ ਗਿਆ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਰਾਹਾਂ ਤੇ,
ਮੈਂ ਝੁਕ ਕੇ ਸਲਾਮ ਕੀਤੀ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ,
ਸ਼ਾਇਦ ਦੇਖਿਆਂ ਨੀ ਮੈਨੂੰ ਮੇਰੇ ਰਾਹਾਂ ਤੇ,
ਉਹ ਚੂੜਾ ਲੈਣ ਆਈ ਸੀ ਸ਼ਗਨਾਂ ਲਈ,
ਮੈ ਸੱਬ ਵੇਚ ਆਇਆ ਆਪਣੇ ਹੀ ਰਾਹਾਂ ਤੇ,
ਖੁਸ਼ੀਆ ਦੇਣ ਵਾਲਾ ਸੀ ਸਾਰਿਆਂ ਨੂੰ,
ਤੈਨੂੰ ਪਾਉਣ ਲੀ ਭਿਖਾਰੀ ਹੋਇਆ ਆਪਣੇ ਹੀ ਰਾਹਾਂ ਤੇਂ,
ਜਿੱਥੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਆਉਣ ਤੇ ਫੁੱਲ ਖਿਲਦੇ ਸੀ,
ਅੱਜ ਕੰਡੇ ਮਿਲੇ ਆ ਮੈਨੂੰ ਆਪਣੇ ਰਾਹਾਂ ਤੇ,
ਉਹ ਜਾਦੇ ਜਾਂਦੇ ਦੁਆ ਲੈ ਗਏ ਨੇ,
ਗੁਮਨਾਮ ਬਦਦੁਆ ਹੋਈ ਮੈਂ ਮਰ ਜਾਣਾਂ ਆਪਣੇ ਹੀ ਰਾਹਾਂ ਤੇ,
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।