कुबूल ही क्यों किया तूने मेरा इश्क
जब तुझे था ही नहीं मुझसे प्यार|
बार बार दिल क्यों दुखाता है मेरा,
एक बार ही ज़ख्म दे देता यार||
–हिरल सिंह
Enjoy Every Movement of life!
कुबूल ही क्यों किया तूने मेरा इश्क
जब तुझे था ही नहीं मुझसे प्यार|
बार बार दिल क्यों दुखाता है मेरा,
एक बार ही ज़ख्म दे देता यार||
–हिरल सिंह

क्या हाल है मेरा, ये तो बस मेरा रब जानता है।
कैसे जी रही हूं मैं, ये तो बस मेरा रब जानता है।
क्या चाहत है मेरी, ये भी बस मेरा रब जानता है।
ये जो कहते है, कि वो मुझे मुझसे भी ज्यादा जानते है,
वो बस मुझे इतना बता दे,
कि ये मेरा रब कौन है,
जो मेरा सब जानता है।