ab apane zakhm dikhaoon kise aur kise nahin,
begaane samajhate nahin aur apano ko dikhate nahin…
अब अपने ज़ख़्म दिखाऊँ किसे और किसे नहीं,
बेगाने समझते नहीं और अपनो को दिखते नहीं…
ab apane zakhm dikhaoon kise aur kise nahin,
begaane samajhate nahin aur apano ko dikhate nahin…
अब अपने ज़ख़्म दिखाऊँ किसे और किसे नहीं,
बेगाने समझते नहीं और अपनो को दिखते नहीं…
आग को बुझा देता है क्रोध ।
आग जलते है हवा में, लेकिन चिंगारी में जलता है क्रोध।
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अपना कविता किसी को मत पढ़ाओ।
अगर कोई पढ़ना चाहते है, उसे सच ढूंढ़ने के लिए बताओ।
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जबाब हर बात पे मत दो।
सिर्फ वक्त का इंतज़ार करो।
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जब बन रहे हों, सुनना पड़ता हैं।
जब बन गये हों, लोग सुनने आते हैं।
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रिश्ते आसमान की रूप।
आज बारिश, कल धूप।
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बात लहर की तरह।
जनम देती रिश्ते, टूटती भी रिश्ते, सोचो ज़रा।
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मैदान में जितना राजनीती होता है, उससे भी ज्यादा होता है घर पर।
घर का बाप ही बनता है नेता, नेता पैदा भी होता हे घर पर।
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जो तुम्हे पाता है, वो किसी को मत बताओ।
समय में प्रयोग करो, नहीं तो लोग समझेंगे के तुम मुर्ख हो।
das dilaa kehdiyaa kehdiyaa gallan di parwaah karega
ethe sunaun wale badhe ne
samjhan waala taa koi koi milda
ethe samjhaun wale badhe ne
ਦੱਸ ਦਿਲਾਂ ਕੀਹਦੀਆ ਕੀਹਦੀਆ ਗੱਲਾਂ ਦੀ ਪਰਵਾਹ ਕਰੇਗਾ..
ਏਥੇ ਸੁਣਾਉਣ😏ਵਾਲੇ ਬੜੇ ਨੇ..
ਸਮਝਣ ਵਾਲਾ ਤਾਂ ਕੋਈ-ਕੋਈ ਮਿਲਦਾ..
ਏਥੇ ਸਮਝਾਉਣ ਵਾਲੇ ਬੜੇ ਨੇ🙃..