Mohabbat hamari bhi asar rakhti hai,
Buhat yaad aayege zara bhool kar to dekho
Mohabbat hamari bhi asar rakhti hai,
Buhat yaad aayege zara bhool kar to dekho
Unj addi c me jitann di
Ik munde tonh dil haar baithi
Bhulekhe pyaar de
Apna sab kuch vaar baithi
Hauli hauli jdon me dil smjhaalya
Kujh k saalan baad ohne phn laalya
Krke aap tabah
Ohne haal puchlya
Ikk ronde Ashiq nu rumal puch lya
Kehda tere jann pichon
Zindagi waang bharann khili hi ni
Sach janni teri jhi koi mili hi ni
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…