कभी थकन के असर का पता नहीं चलता
वो साथ हो तो सफ़र का पता नहीं चलता
वही हुआ कि मैं आँखों में उसकी डूब गया
वो कह रहा था भँवर का पता नहीं चलता
उलझ के रह गया सैलाब कुर्रए-दिल से
नहीं तो दीदा-ए-तर का पता नहीं चलता
उसे भी खिड़कियाँ खोले ज़माना बीत गया
मुझे भी शामो-सहर का पता नहीं चलता
ये मंसबो का इलाक़ा है इसलिए शायद
किसी के नाम से घर का पता नहीं चलता
Kinni nazdeek e tu mere kinj dassa mein tenu
Tu taa saahan ch ghuleya hoyia mehsus howe menu..!!
ਕਿੰਨੀ ਨਜ਼ਦੀਕ ਏ ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਕਿੰਝ ਦੱਸਾਂ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ
ਤੂੰ ਤਾਂ ਸਾਹਾਂ ‘ਚ ਘੁਲਿਆ ਹੋਇਆ ਮਹਿਸੂਸ ਹੋਵੇ ਮੈਨੂੰ..!!