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Zinda hum tab bhi the || sad but true shayari || hindi shayari

Zinda hum tab bhi the, 
Zinda hum ab bhi hain, 
Magar tab tumhaare pyaar main the,❤
Ab tumhaare intezaar main hain.💔

ज़िंदा हम तब भी थे,
ज़िंदा हम अब भी हैं,
मगर तब तुम्हारे प्यार में थे,❤
अब तुम्हारे इंतज़ार में हैं.💔

Title: Zinda hum tab bhi the || sad but true shayari || hindi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Vaada hai aapse || love hindi shayari || true love

Har pal mohobbat karne ka vaada  hai aapse❤️
Har pal sath nibhane ka vaada hai aapse🤗
Kabhi yeh Matt samjhna hum aapko bhool jayenge❌
Zindagi bhar sath chalne ka vaada hai aapse👫
Humein fir suhana nazara mila hai😍
Kyunki zindagi mein sath tumhara mila hai😇
Ab zindagi mein koi khwahish nhi Rahi🙌
Kyunki humein ab tumhari bahon ka sahara mila hai🙈

हर पल मोहब्बत करने का वादा है आपसे,❤️
हर पल साथ निभाने का वादा है आपसे,🤗
कभी ये मत समझ न हम आपको भूल जायेंगे,❌
जिंदगी भर साथ चलने का वादा है आपसे।👫
हमे फिर सुहाना नज़ारा मिला है, 😍
क्योंकि जिंदगी में साथ तुम्हारा मिला है, 😇
अब जिंदगी में कोई ख्वाइश नही रही, 🙌
क्योंकि हमे अब तुम्हारी बाहों का सहारा मिला है।🙈

Title: Vaada hai aapse || love hindi shayari || true love


Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry

थी मै,शांत चित्त बहती नदी – सी
तलहटी में था कुछ जमा हुआ
कुछ बर्फ – सा ,कुछ पत्थर – सा।
शायद कुछ मरा हुआ..
कुछ अधमरा सा।
छोड़ दिया था मैंने
हर आशा व निराशा।
होंठो में मुस्कान लिए
जीवन के जंग में उलझी
कभी सुलगी,कभी सुलझी..
बस बहना सीख लिया था मैंने।
जो लगी थी चोट कभी
जो टूटा था हृदय कभी
उन दरारों को सबसे छुपा लिया था
कर्तव्यों की आड़ में।
फिर एक दिन..
हवा के झोंके के संग
ना जाने कहीं से आया
एक मनभावन चंचल तितली
था वो जरा प्यासा सा
मनमोहक प्यारा सा।
खुशबूओं और पुष्पों
की दुनिया छोड़
सारी असमानताओं और
बंधनों को तोड़
सहमी – बहती नदी को
खुलकर बहना सीखा गया,
अपने प्रेम की गरमी से
बर्फ क्या पत्थर भी पिघला गया।
पाकर विश्वास कोमल भावों से जोड़े नाते का
सारी दबी अपेक्षाएं हो गई फिर जीवंत
लेकिन क्या पता था –
होगा इसका भी एक दिन अंत !
तितली को आयी अपनों की याद
मुड़ चला बगिया की ओर
सह ना सकी ये देख नदी
ये बिछड़न ये एकाकीपन
रोयी , गिड़गिड़ाई ..की मिन्नतें
दर्द दुबारा ये सह न पाऊंगी
सिसक सिसक कर उसे बतलाई।
नहीं सुनना था उसे,
नहीं सुन पाया वो।
नहीं रुकना था उसे,
नहीं रुक पाया वो।
तेज उफान आया नदी में,
क्रोध और अवसाद
छाया मन में,
फिर छला था
नेह जता कर किसी ने।
आवाज देती..लहरें,
उठती और गिरती
किनारों से टकराती,
हो गई घायल।
बीत गए असंख्य क्षण
उसकी वापसी की आस में
लेकिन सामने था, तो सिर्फ शून्य।
हो गई नदी फिर से मौन..
छा गई निरवता।
लेकिन अबकी बार,
नहीं जमा कुछ तलहटी में
कुछ बर्फ सा,
कुछ पत्थर सा।
बस रह गया भीतर
रक्तिम हृदय..
और लाल रक्त।
जो रिस रिस कर
घुलता जा रहा है
मिलता जा रहा है
अपने ही बेरंग पानी में…।।

Title: Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry