Do Pal Da Hai Saath, Pata Nahi Kado Vichad Jana
Rishteya Da Kee Pata, Kado Tut Jana
Puch Liya Karo Kade Haal-Chaal Sade Dil Da
Zindgi Da Kee Pata, Asi Kado Muk Jana!
Do Pal Da Hai Saath, Pata Nahi Kado Vichad Jana
Rishteya Da Kee Pata, Kado Tut Jana
Puch Liya Karo Kade Haal-Chaal Sade Dil Da
Zindgi Da Kee Pata, Asi Kado Muk Jana!
अजब सी हालत है तेरे जाने के बाद,
मुझे भूख लगती नहीं खाना खाने के बाद,
मेरे पास दो ही समोसे थे जो मैंने खा लिए,
एक तेरे आने से पहले, एक तेरे जाने के बाद।
राजनीति की दुनिया में खेल बहुत है,
कोई जीता है, कोई हारा है।
सत्ता की भूख और वाद-विवाद,
मन में जलती चिंगारी है।
राजनेताओं की रंगीन छलावा,
जनता को वहमों में बँधाता है।
कुछ वादे खाली और कुछ झूले धूले,
आम आदमी को खोखला बनाता है।
वाद-विवाद के आगे सच्चाई छिपती,
लोकतंत्र की मूल्यों पर भारी है।
शोर और तामझाम में खो गई है,
सम्मान, सद्भाव और आदर्शि है।
नीतिबद्धता और समर्पण की कमी,
राजनीति को कर रही है मिट्टी।
सच्ची सेवा की बजाए प्रतिष्ठा,
हौसले को तोड़ रही है मिट्टी।
चाहे जितना बदले युगों का सफ़र,
राजनीति का रंग हर बार वही।
प्रशासनिक शक्ति की लालसा में,
जनता भूल जाती है खुद को वही।