kise gair pichhe zindagi ton pehla
zindagi den wale baare soch lyaa karo
ਕਿਸੇ ਗੈਰ ਪਿੱਛੇ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਮੁਕਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ,
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਬਾਰੇ ਸੋਚ ਲਿਆ ਕਰੋ..
kise gair pichhe zindagi ton pehla
zindagi den wale baare soch lyaa karo
ਕਿਸੇ ਗੈਰ ਪਿੱਛੇ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਮੁਕਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ,
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਬਾਰੇ ਸੋਚ ਲਿਆ ਕਰੋ..
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…