zindagi rahi taa fir mila ge
marn to bad kon yaad rakhda
zindagi rahi taa fir mila ge
marn to bad kon yaad rakhda
मरहम घाव ढूंढ रहे हैं, पत्ते छांव ढूंढ रहे हैं,
मंजिलें थोड़ी दूर हैं, रास्ते पांव ढूंढ रहे हैं...
गुमराह करने वालों की भीड़ बहुत बड़ी है
वहां मत जाना वो चलने को बस दाव ढूंढ रहे हैं...
बेच देंगे वो सरकारें भी इक दिन
मिलने का सही भाव ढूंढ रहे हैं...
बेगुनाहों को बेजान करना आदत है इनकी
बस, मूंछों को देने के लिए झूठा ताव ढूंढ रहे
हैं...
Na rah mili Na manzil mili
Sath hamare bas gam the
Vo to hmesha se hi sahi the
Unke liye sirf hum galat the 💔
ना राह मिली ना मंज़िल मिली।
साथ हमारे बस गम थे।।
वो तो हमेशा से ही सही थे।
उनके लिए सिर्फ गलत हम थे।।💔