
Thoda taras taan khaya kar zinde ni..!!
Asi mar mukk jana ajj kal vich
Sanu bahuta na staya kar zinde ni..!!

Chalane wale hathon se patwar, choot jaya karti hai..
Aschi se aschi kashtiyan bhi lehron mein, toot jaya karti hai..
Kisi taraf kinara dikhayi nahi deta..
Jab kismat sath na de, aur takdeer rooth jaya karti hai..💔
चलाने वाले हाथों से पतवार, छूट जाया करती है..
अच्छी से अच्छी कश्तियां भी लैहरों में, टूट जाया करती हैं..
किसी तरफ़ किनारा दिखाई नहीं देता..
जब किस्मत साथ ना दे, और तकदीर रूठ जाया करती है..💔
रूप था उसका बहुत विशाल, राक्षस था वो बहुत भारी..
नाम था दशानन उसका, बुद्धि न जिसकी किसी से हारी..
हर कोई डरता था उससे, हो देव, दैत्य, चाहे नर-नारी..
प्रकोप था जिसका लोकों में, धरती कांपती थी सारी..
देखके ताकत को उसकी, भागे खड़े पैर बड़े बाल-धारी..
विशाल साम्राज्य पर उसके, भारी पड़ गई बस एक नारी..
घमंड को उसके चूर कर दिया, कहा समझ ना तू निर्बल नारी..
विधवंश का तेरे समय आ गया, ले आ गयी देख तेरी बारी..
लंका में बचेगा ना जीव कोई, मति जो गई तेरी मारी..
आराध्य से मेरे दूर कर दिया, भुगतेगी तेरी पीढी सारी..
रघुनंदन आए कर सागर पार, आए संग वानर गदा धारी..
एक-एक कर सबको मोक्ष दिया, सियाराम चरण लागी दुनिया सारी..