ज़िन्दगी के सफ़र में
मुसाफिर चलता गया
जैसा रब ने चाहा
वैसा सफर कटता गया
मुसाफिर आगे बढ़ते रहे
और मंज़िल का रास्ता घटता गया💯
ज़िन्दगी के सफ़र में
मुसाफिर चलता गया
जैसा रब ने चाहा
वैसा सफर कटता गया
मुसाफिर आगे बढ़ते रहे
और मंज़िल का रास्ता घटता गया💯
माना मुझे अब जरूरत नहीं तेरी , पर जिंदगी में एक मलाल तो है ।
कबूलनामा भी दे चुके महफिलों में पर , लोगों की निगाहों में कुछ सवाल तो है ।।
सपनों सा लगता एक ख्वाब तो है , मेरा हर अंदाज़ लाजवाब तो है ।
चाहता नहीं मेरी कलम से कोई बेइज्जत हो जाए , वरना मेरे पास भी कुछ लोगों का हिसाब तो है ।।
हाँ मोहब्बत भूल थी मेरी , आज बेबाकी से एक गुनाह कुबूल करता हूँ ।
कुछ काले किस्से हैं बीते हुए लम्हें , अब हर किस्से को मशहूर करता हूँ ।।
जिद्दी है मेरा दिल बड़ा , इसे आज मैं ज़रा मजबूर करता हूँ ।
बहुत हो चुकी मोहब्बत में नाफरमानी , सिर आँखों पर अपना गुरूर करता हूँ ।।
Naa hun mainu pyaar di lodh
naa hun mainu yaar di lodh
me hun bas kalla hi theek haa
mainu bas hun apne aap di lodh
ਨਾ ਹੁਣ ਮੈਨੂੰ ਪਿਆਰ ਦੀ ਲੋੜ
ਨਾਂ ਹੁਣ ਮੈਨੂੰ ਯਾਰ ਦੀ ਲੋੜ
ਮੈਂ ਹੁਣ ਬੱਸ ਕਲਾਂ ਹੀ ਠੀਕ ਹਾਂ
ਮੈਨੂੰ ਬਸ ਹੁਣ ਆਪਣੇ ਆਪ ਦੀ ਲੋੜ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷