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जुर्म दोनो ही संगीन हैं || Hindi shayari 2 lines

Kuchh apna andaaz hai kuchh mausam rangeen hai
tareef karu yaa chup rahu jurm dono hi sangeen hai

कुछ अपना अंदाज हैं कुछ मौसम रंगीन हैं,
तारीफ करूँ या चुप रहूँ जुर्म दोनो ही संगीन हैं ?

Title: जुर्म दोनो ही संगीन हैं || Hindi shayari 2 lines

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


वो मुसाफिर || hindi best shayari latest

जाते जाते एक उम्दा तालीम दे गया,
वो मुसाफिर,
खुदकी तलाश में घर से निकल गया,
वो मुसाफिर,
सोचा साथ जाऊं मैं भी,
पर जाऊंगा कहां,
जा चुका होगा मीलों दूर,
उसे पाऊंगा कहां,
इसी सोच में रात हुई,
नींद का झोंका आ गया,
सुबह आंखे खुली तो सोचा,
क्या वो मौका आज आ गया ?
के चला जाऊं सबसे इतना दूर के कुछ ना हो,
गहरी नींद में बेड़ियां मिले पर सचमुच ना हो,
सच हो तो बस आसमां में परिंदो सी उड़ान हो,
चाहूंगा हर सितमगर का बड़ा सा मकान हो,
वहां आवाज़ देकर झोली फैलाएगा वो मुसाफिर,
तुम्हे देख भीगी पलकें उठाएगा वो मुसाफिर,
मोहब्बत से एक रोटी खिलाकर देखना तुम,
शोहरत से दामन भर जाएगा वो मुसाफिर...

Title: वो मुसाफिर || hindi best shayari latest


Kiski dadhi ki aag || akbar birbal kahani

बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”

“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।

मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”

बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”

Title: Kiski dadhi ki aag || akbar birbal kahani