मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Enjoy Every Movement of life!
मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
ਰੱਬਾ ਇਹ ਕੀ ਕਹਿਰ ਕਮਾਇਆ ਵੇ
ਮਸਾ ਮਰ ਕੇ ਯਾਰ ਸੀ ਪਾਇਆ ਵੇ
ਜੇ ਉਹ ਖੁਸ਼ ਮੇਰੇ ਬਿਨ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਨਾਲ
ਕਿਉ ਗੁਰਲਾਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰੀਤ ਨਾਲ ਮਿਲਾਇਆ ਵੇ💔