मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Enjoy Every Movement of life!
मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Jiwe tufaani haneriyan da aagaz hona
Aafat e Ohda naraz hona..!!
ਜਿਵੇਂ ਤੂਫ਼ਾਨੀ ਹਨੇਰੀਆਂ ਦਾ ਆਗਾਜ਼ ਹੋਣਾ
ਆਫ਼ਤ ਏ ਓਹਦਾ ਨਾਰਾਜ਼ ਹੋਣਾ..!!🔥
Har roj talashti hu khud ko
Hu shayad mein bhi yahi kahi
Milu gum shayad kisi khayal mein
Khojti hu khud ko khud hi ke swaal mein 🥀
हर रोज तलाशती हू खुद को ,
हू शायद मैं भी यहीं कहीं,
मिलु गुम शायद किसी ख्याल में,
खोजती हु खुद को खुदी के सवाल में,🥀