मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Enjoy Every Movement of life!
मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Pata nahi tere ch esa ki e sajjna
Jadon vi dekhde haan rabb yaad aa janda e💓..!!
ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਤੇਰੇ ‘ਚ ਐਸਾ ਕੀ ਏ ਸੱਜਣਾ
ਜਦੋਂ ਵੀ ਦੇਖਦੇ ਹਾਂ ਰੱਬ ਯਾਦ ਆ ਜਾਂਦਾ ਏ💓..!!
