मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Malang ban jande ne ishqan vale
Rehnde apne jahan ch viyast ne..!!
Vech ke khwahishan supne apne
Khud vich rehnde mast ne..!!
ਮਲੰਗ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਇਸ਼ਕਾਂ ਵਾਲੇ
ਰਹਿੰਦੇ ਆਪਣੇ ਜਹਾਨ ‘ਚ ਵਿਅਸਤ ਨੇ..!!
ਵੇਚ ਕੇ ਖੁਆਹਿਸ਼ਾਂ ਸੁਪਨੇ ਆਪਣੇ
ਖ਼ੁਦ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦੇ ਮਸਤ ਨੇ..!!
Chehre di khamoshi te na ja sajjna
sawaah de thalle hamesha agg dabbi hundi e
ਚਿਹਰੇ ਦੀ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਤੇ ਨਾ ਜਾ ਸੱਜਣਾ
ਸਵਾਹ ਦੇ ਥੱਲੇ ਹਮੇਸ਼ਾ ਅੱਗ ਦਬੀ ਹੁੰਦੀ ਏ