मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Waqt badhaa baimaan hai
khushi wele do pal da
te gam wele mukda hi nahi
ਵਕਤ ⏱️ ਬੜਾ ਬੇਈਮਾਨ ਹੈ
ਖੁਸ਼ੀ 😊 ਵੇਲੇ ਦੋ ਪਲ ਦਾ
ਤੇ ਗ਼ਮ 😭 ਵੇਲੇ ਮੁੱਕਦਾ ਹੀ ਨਹੀ..
किसी न किसी पे किसी को ऐतबार हो जाता है ,
अजनबी कोई शख्स यार हो जाता है ,
खूबियों से नहीं होती मोहब्बत सदा ,
खामियों से भी अक्सर प्यार हो जाता है 🥀
किन लफ़्ज़ों में इतनी कड़वी कसैली बात लिखूं ,
मैं सच लिखूं के अपने हालत लिखूं ,
कैसे लिखूं मैं चांदनी रातें ,
जब गरम हो रेत तो कैसे मैं बरसात लिखूं .✨
सभी नग्मे साज़ में गाये नहीं जाते ,
सभी लोग महफ़िल में बुलाये नहीं जाते ,
कुछ पास रह कर भी याद नहीं आते ,
कुछ दूर रह कर भी भूलाये नहीं जाते!❤️