ख़ामोश रहता हूं, जीने की कोई आस नहीं मिलती... पहले बात कुछ और थी, अब वो सुकून की सांस नहीं मिलती... मिलती थी पहले हर छोटी छोटी बातों पर, ढेर सारी खुशियां... अब इन अदाकार चेहरों में मुस्कुराहट भी, कुछ ख़ास नहीं मिलती....
ख़ामोश रहता हूं, जीने की कोई आस नहीं मिलती... पहले बात कुछ और थी, अब वो सुकून की सांस नहीं मिलती... मिलती थी पहले हर छोटी छोटी बातों पर, ढेर सारी खुशियां... अब इन अदाकार चेहरों में मुस्कुराहट भी, कुछ ख़ास नहीं मिलती....
बंदिशों से अब कैसे खुदकी करूं हिफाज़त मैं,
सवेरे से है मोहब्बत पर, अंधेरों में रहने कि आदत है…
आफ़त है कि चिराग़ का इल्म कैसे होगा,
पता नहीं जब सवेरा होगा तो क्या होगा…
क्या होगा जो खुदसे कर लूं बगावत मै,
जीत लूं खुदको अगर हार जाऊं तो आफ़त है…
हारने का शोंक नहीं लड़ना अब रास नहीं आता,
सब कहते है मुझे तू हरकतों से बाज़ नहीं आता…
देखो, हरकतों में भी मेरी तहज़ीब और शराफत है,
जीत लेंगे दुनिया भी अगर रब की इजाज़त है… 🙃
