रूह ही रूह को जानती है
रूह की रूह से प्रीत
रूह की रूहदारी में
रूह है रूह की मीत
रूह झूमे❤️
रूह बाबरी
रूह की अद्भुत रीत❤️
#मन
Mann✍️
रूह ही रूह को जानती है
रूह की रूह से प्रीत
रूह की रूहदारी में
रूह है रूह की मीत
रूह झूमे❤️
रूह बाबरी
रूह की अद्भुत रीत❤️
#मन
Mann✍️
शाम बीती और रात हुई, गमों की फिर बरसात हुई..
तुझे भुलने को फिर से जाम पिया, गलती फिर मेरे हाथ हुई..
फिर से बहक गए लफ्ज मेरे, लफ्जों पे फिर से दात हुई..
दिलजले थे वहां कई मुझ जैसे, उनकी भी इश्क में मात हुई..
वही एक तरह का हर किस्सा, इश्क की भी भला कोई जात हुई..
हर कहानी ख़ुशी से शुरू हुई, ख़तम आंसुओं के साथ हुई..
महफिल को छोड़ चले घर की ओर, तन्हाई से फिर मुलाकात हुई..
तेरी याद बढ़ गई हर जाम के साथ, भला ये भी कोई बात हुई..
saanu tu injh chahida jive hundi e
piyaase nu paani di lodh
har modh te jaape saanu sirf teri hi thod
ਸਾਨੂੰ ਤੂੰ ਇੰਝ ਚਾਹੀਦਾ
ਜਿਵੇ ਹੁੰਦੀ ਏ ਪਿਆਸੇ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਲੋੜ
ਹਰ ਮੋੜ ਤੇ ਜਾਪੇ ਸਾਨੂੰ ਸਿਰਫ ਤੇਰੀ ਹੀ ਥੋੜ