मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Enjoy Every Movement of life!
मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Lagda e dard mera pahuncheya e khud tak
Taan hi asmaan vi ajj futt futt ke ro reha e..!!
ਲੱਗਦਾ ਏ ਦਰਦ ਮੇਰਾ ਪਹੁੰਚਿਆ ਏ ਖੁਦਾ ਤੱਕ
ਤਾਂ ਹੀ ਆਸਮਾਨ ਵੀ ਅੱਜ ਫੁੱਟ ਫੁੱਟ ਕੇ ਰੋ ਰਿਹਾ ਏ..!!
