मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Enjoy Every Movement of life!
मुठ्ठी भर ज़मीं में अपनी भुख़ बो रहा हूं,
मिट्टी तन पर लगी थी पर कमीज़ धों रहा हूं,
रो रहा हूं के बारिश की बूंदे बहुत कम थी, पर
कहूंगा नहीं भूखे पेट ना जाने कबसे सो रहा हूं...
Tu saanu dil vich rakhi
dimaag vich taa dushman rakhde ne
ਤੂੰ ਸਾਨੂੰ ਦਿੱਲ ਵਿੱਚ ਰੱਖੀ
ਦਿਮਾਗ ਵਿੱਚ ਤਾਂ ਦੁਸ਼ਮਣ ਰੱਖਦੇ ਨੇ
