
saadhe wal mukhda modh
Enjoy Every Movement of life!

ज़िन्दगी के अंजान सफर में निकल के देखूंगा,
ये मौत का दरिया है तो चल के देखूंगा...
सवाल ये है कि रफ्तार किसकी कितनी है,
मैं हवाओं से आगे निकल कर देखूंगा...
इक मज़ाक अच्छा रहेगा चांद तारों से,
मैं आज शाम से पहले ढल कर देखूंगा...
रोशनी बाटने वालों पर क्या गुजरती है,
आज मैं इक चिराग़ की तरह जल कर देखूंगा...
ना जाने क्यों वो हमे देखकर नजरे झुका रहे है,
ना जाने क्यों वो हमे देखकर नजरे झुका रहे है,
ना जाने क्यों वो हमे देखकर बिना वजह मुस्कुरा रहे है,
कोई तो राज ह जो वो दिल मे छुपा रहे है।