Hath jodh k kehnde aa
chete aayiaa na kar ni
ਹੱਥ ਜੋੜ ਕੇ ਕਹਿੰਦੇ ਆ
ਚੇਤੇ ਆਇਆ ਨਾ ਕਰ ਨੀ
Hath jodh k kehnde aa
chete aayiaa na kar ni
ਹੱਥ ਜੋੜ ਕੇ ਕਹਿੰਦੇ ਆ
ਚੇਤੇ ਆਇਆ ਨਾ ਕਰ ਨੀ
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
खो गई थी धड़कनें जो कहीं
वो वापस ले आया हूं मैं,
थोड़ी ठीक है थोड़ी ज़ख्मी हैं
फिर भी वापस ले आया हूं मैं,
क्या बातें थी याद करो तो दिल बैठ गया,
कदम लड़खड़ाते रहे, वो पल याद आते रहे,
आज बहकते बहकते ही सही,
खुद को वापस ले आया हूं मैं,
हाथ ज़ख्मों पर हैं,
और ज़ख्म धड़कनों पर,
बाजी पलटती रही,
हम धड़कनें लगाते रहे ज़ख्मों पर,
थोड़ी देर और सही,
आज शाम नहीं कल की सवेर सही,
घर तो लौट आया हूं मैं,
देखो खुदको वापस ले आया हूं मैं.....