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Pyaar Saade Di Likhni Si Jo Gazal || punjabi alone sayari

Pyaar Saade Di Likhni Si Jo Gazal Adhoori Ae
Yaadan dE Varke Vi Hun Ta Fattde Jande Ne
Khush Reh Yaara Tuu Apni Zindgi Vich
#Reet di Zindgi dE Din tA Ghatde Jande Ne

Title: Pyaar Saade Di Likhni Si Jo Gazal || punjabi alone sayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Best shayaris || Hindi 2 Liners

बाप का प्यार जिनको नहीं मिला, वो कंधे झुका होते।

माँ की प्यार जिनको नहीं मिला, वो क्रिमिनल बनते।

हर तरफ बालू ही बालू, कहां पर मिलेगा समुंदर?

कहां पर मिलेगा शांति, दुःख की अगन में खोया हे अंदर!

कभी कभी इंसान का बातचीत सुनाई देता है।

एकदम इंसान जैसा, लेकिन इंसानियत छुपी हुई है।  

कहाँ से आया हुं, पता नहीं; कहाँ जाऊँगा वो भी पता नहीं।

सिर्फ ये पता है की मैं जिंदगी जी रहा हूं यही। 

चुपचाप बैठे रहना भी एक काम होता है।

हर बात में कुत्ते की तरह भूँकना केवल बेवक़ूफ़िआ है।

गर्मी में पसीना दिखाई देता है, सर्दी में कभी नहीं।

बेवकूफ दिखाकर काम करते है, लेकिन बुद्धिमान समझते है चुपचाप रहना ही सही।

जो ज्यादा बात करते है, वो ऊपर से चालाक है।

जो कम बात करते है, वो अंदर से मजबूत होते हे।

बड़ा आदमी बड़ा चीज को छोटा करके दिखता है।

छोटा आदमी छोटा चीज को बड़ा करके बताता है।  

आंधी आयी थी आज बारिश के साथ।

एक छतरी के नीचे दो, हाथ में हाथ।

प्यार बारूद की तरह जान ले सकता है।

इंतज़ार आग की तरह जला सकता है।

वक्त कभी झूठ नहीं बोलता, लेकिन प्यार बोल सकता है।

इंसानियत समय की तरह सच है, लेकिन इंसान हमेशा झूठा होता है।

हर इंसान झूठा नहीं है।

झूठ सिर्फ वो बोलता है, जिनका दिल छोटा और दिमाग बड़ा है।

दिमाग छोटा है या बड़ा, कुछ फर्क नहीं पड़ता।

दिल हमेशा बड़ा होनी चाहिए, ज्ञानी आदमी यही कहता।  

अगर सूरज नहीं होता तो रौशनी मिलती कहाँ से।

अगर औरत नहीं होती तो मर्द आता कहाँ से।

प्रतियोगिता प्रतिभा को दबा देते है।

ऊपर बैठने की लालच में हम ज़मीन को भूल जाते है।

Title: Best shayaris || Hindi 2 Liners


Neend bechaini si katt ti rahi

नींद बेचैनी से कटती रही

ख्वाब कोहरे मे छुपती रही

तेरी आवाज़ से मैं अनसुनी रही

तु मिला न कही मंज़िलों पे

मैं भटकती भटकती

तुझे ढूंढती रही

तेरा मेरा रिश्ता इन

काग़ज़ों पे खत्म हो गया

साथ तेरा मेरा युं सिमट सा गया

जैसे चार दिवारी में बंध सा गया 

तेरी बातों को मैं याद करता

तेरी हँसी को मैं याद करता

हमारे उन्ही हसीन पलो को

हररोज सजाया करता

Title: Neend bechaini si katt ti rahi