pyaar kade vapaar hon lag paye
yaar de ghar e ikraar hon lag paye
ਪਿਆਰ ਵਪਾਰ ਹੋਣ ਲੱਗ ਪਏ,
ਯਾਰ ਦੇ ਘਰ ਈ ਇਕਰਾਰ ਹੋਣ ਲੱਗ ਪਏ।
..ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਔਲਖ
pyaar kade vapaar hon lag paye
yaar de ghar e ikraar hon lag paye
ਪਿਆਰ ਵਪਾਰ ਹੋਣ ਲੱਗ ਪਏ,
ਯਾਰ ਦੇ ਘਰ ਈ ਇਕਰਾਰ ਹੋਣ ਲੱਗ ਪਏ।
..ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਔਲਖ
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
उठता है तूफान सीने में जब
जहन में सवाल इक आता है
जब जाना ही है दूर तो
क्यों करीब कोई आता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
जिसे देखना भी नही मुनासिब
आंखे बंद कर करीब उसी को पता है
ढूंढ ले खामियां उसकी हजार पर
दिल तो आज भी बेहतर उसी को बताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
सपने देखता है नई दुनिया बसाने के तू
नींद तेरी आज भी वही चुराता है
बेख्याल होने का करले तमसील भले
मिलने का ख्याल तो आज भी सताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
sang-e-maramar se taraasha khuda ne tere badan ko,
baakee jo patthar bacha usase tera dil bana diya..
संग-ए-मरमर से तराशा खुदा ने तेरे बदन को,
बाकी जो पत्थर बचा उससे तेरा दिल बना दिया…