
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।

चंद्रयान-3 का सफर फिर से आरंभ हुआ, चांद की ओर हमारा प्यार फिर से बढ़ा।
जवानी बिताई चंद्रयान-2 में, अब नए सपनों के साथ हम आएंगे।
चांद पर तिरंगा लहराएँगे हम गर्व से, सितारों की ओर हम फिर से निकलेंगे।
इस नए यात्रा में हमारी मंजिल हो चांद, चंद्रयान-3 के संग हम सभी लहराएंगे झंड।
अपने तय करे हम नये इतिहास की प्रारंभ, चंद की खोज में हम सभी हैं महिमा के सभी रूप।
चंद्रयान-3 हमारी शान है, गर्व है हमें, इस यात्रा में हम सभी बढ़ेंगे और जीतेंगे।