ਕਹਿੰਦੇ ਕਿਨਾ ਚਿਰ ਹੋ ਗਿਆ ਉਹਨੇ ਸਾਨੂੰ ਬੁਲਾਇਆ ਹੀ ਨੀ
ਸਿਵਿਆ ਤੱਕ ਨਾਲ ਜਾਣਾ ਸੀ
ਪਰ ਉਹ ਅੱਜ ਆਇਆਂ ਹੀ ਨੀ
ਮੈਨੂੰ ਪਤਾ ਸੀ ਉਹਦਾ ਵੀ ਉਹ ਬਦਲ ਜਾਊਗਾ
ਤਾਹੀ ਤਾਂ ਮੈ ਉਹਨੂੰ ਕੋਈ ਲਾਰਾ ਲਾਇਆ ਹੀ ਨੀ
ਕਿਨਾ ਟਾਇਮ ਹੋ ਚਲਿਆ ਮੈਨੂੰ ਰੁੱਸੀ ਨੂੰ
ਪਰ ਉਹਨੇ ਮੈਨੂੰ ਮਨਾਇਆ ਹੀ ਨੀ
….. gumnaam ✍️✍️✍️
ਕਹਿੰਦੇ ਕਿਨਾ ਚਿਰ ਹੋ ਗਿਆ ਉਹਨੇ ਸਾਨੂੰ ਬੁਲਾਇਆ ਹੀ ਨੀ
ਸਿਵਿਆ ਤੱਕ ਨਾਲ ਜਾਣਾ ਸੀ
ਪਰ ਉਹ ਅੱਜ ਆਇਆਂ ਹੀ ਨੀ
ਮੈਨੂੰ ਪਤਾ ਸੀ ਉਹਦਾ ਵੀ ਉਹ ਬਦਲ ਜਾਊਗਾ
ਤਾਹੀ ਤਾਂ ਮੈ ਉਹਨੂੰ ਕੋਈ ਲਾਰਾ ਲਾਇਆ ਹੀ ਨੀ
ਕਿਨਾ ਟਾਇਮ ਹੋ ਚਲਿਆ ਮੈਨੂੰ ਰੁੱਸੀ ਨੂੰ
ਪਰ ਉਹਨੇ ਮੈਨੂੰ ਮਨਾਇਆ ਹੀ ਨੀ
….. gumnaam ✍️✍️✍️
dilo jaan se karenge hifaazat teree,
bas ek baar too kah de ki, main amaanat hoon teree…
दिलो जान से करेंगे हिफ़ाज़त तेरी,
बस एक बार तू कह दे कि, मैं अमानत हूं तेरी…
अकबर का साला हमेशा से ही बीरबल की जगह लेना चाहता था। अकबर जानते थे कि बीरबल की जगह ले सके ऐसा बुद्धिमान इस संसार में कोई नहीं है। फिर भी जोरू के भाई को वह सीधी ‘ना’ नहीं बोल सकते थे। ऐसा कर के वह अपनी लाडली बेगम की बेरुखी मोल नहीं लेना चाहते थे। इसीलिए उन्होने अपने साले साहब को एक कोयले से भरी बोरी दे दी और कहा कि-
जाओ और इसे हमारे राज्य के सबसे मक्कार और लालची सेठ – सेठ दमड़ीलाल को बेचकर दिखाओ , अगर तुम यह काम कर गए तो तुम्हें बीरबल की जगह वज़ीर बना दूंगा।
अकबर की इस अजीब शर्त को सुन कर साला अचंभे में पड़ गया। वह कोयले की बोरी ले कर चला तो गया। पर उसे पता था कि वह सेठ किसी की बातो में नहीं आने वाला ऊपर से वह उल्टा उसे ही चूना लगा देगा। हुआ भी यही सेठ दमड़ीलाल ने कोयले की बोरी के बदले एक ढेला भी देने से इनकार कर दिया।
साला अपना सा मुंह लेकर महल वापस लौट आया और अपनी हार स्वीकार कर ली.
अब अकबर ने वही काम बीरबल को करने को कहा।
बीरबल कुछ सोचे और फिर बोले कि सेठ दमड़ीलाल जैसे मक्कार और लालची सेठ को यह कोयले की बोरी क्या मैं सिर्फ कोयले का एक टुकड़ा ही दस हज़ार रूपये में बेच आऊंगा। यह बोल कर वह तुरंत वहाँ से रवाना हो गए।
सबसे पहले उसने एक दरज़ी के पास जा कर एक मखमली कुर्ता सिलवाया। हीरे-मोती वाली मालाएँ गले में डाली। महंगी जूती पहनी और कोयले को बारीक सुरमे जैसा पिसवा लिया।
फिर उसने पिसे कोयले को एक सुरमे की छोटी चमकदार डिब्बी में भर लिया। इसके बाद बीरबल ने अपना भेष बदल लिया और एक मेहमानघर में रुक कर इश्तिहार दे दिया कि बगदाद से बड़े शेख आए हैं। जो करिश्माई सुरमा बेचते हैं। जिसे आँखों में लगाने से मरे हुए पूर्वज दिख जाते हैं और यदि उन्होंने कहीं कोई धन गाड़ा है तो उसका पता बताते हैं। यह बात शहर में आग की तरह फ़ैली।
सेठ दमड़ीलाल को भी ये बात पता चली। उसने सोचा ज़रूर उसके पूर्वजों ने कहीं न कहीं धन गाड़ा होगा। उसने तुरंत शेख बने बीरबल से सम्पर्क किया और सुरमे की डिब्बी खरीदने की पेशकश की। शेख ने डिब्बी के 20 हज़ार रुपये मांगे और मोल-भाव करते-करते 10 हज़ार में बात तय हुई।
पर सेठ भी होशियार था, उसने कहा मैं अभी तुरंत ये सुरमा लगाऊंगा और अगर मुझे मेरे पूर्वज नहीं दिखे तो मैं पैसे वापस ले लूँगा।
बीरबल बोला, “बिलकुल आप ऐसा कर सकते हैं, चलिए शहर के चौराहे पर चलिए और वहां इसे जांच लीजिये।”
सुरमे का चमत्कार देखने के लिए भीड़ इकठ्ठा हो गयी।
तब बीरबल ने ऊँची आवाज़ में कहा, “ये सेठ अभी ये चमत्कारी सुरमा लगायेंगे और अगर ये उन्ही की औलाद हैं जिन्हें ये अपना माँ-बाप समझते हैं तो इन्हें इनके पूर्वज दिखाई देंगे और गड़े धन के बारे में बताएँगे। लेकिन अगर आपके माँ-बाप में से किसी ने भी बेईमानी की होगी और आप उनकी असल औलाद नहीं होंगे तो आपको कुछ भी नहीं दिखेगा।
और ऐसा कहते ही बीरबल ने सेठ की आँखों में सुरमा लगा दिया।
फिर क्या था, सिर खुजाते हुए सेठ ने आँखें खोली। अब दिखना तो कुछ था नहीं, पर सेठ करे भी तो क्या करे!
अपनी इज्ज़त बचाने के लिए सेठ ने दस हज़ार बीरबल के हाथ थमा दिये। और मुंह फुलाते हुए आगे बढ़ गए।
बीरबल फ़ौरन अकबर के पास पहुंचे और रुपये थमाते हुए सारी कहानी सुना दी।
अकबर का साला बिना कुछ कहे अपने घर लौट गया। और अकबर-बीरबल एक दूसरे को देख कर मंद-मंद मुसकाने लगे। इस किस्से के बाद फिर कभी अकबर के साले ने बीरबल का स्थान नहीं मांगा।