Bahut gumnaam hai chaht ke raaste
tu bhi laapata me bhi laapta
tu bhi laapata me bhi laapta
बहुत गुमनाम है चाहत के रास्ते
तू भी लापता मैं भी लापता

जब दिल में दबी उस चाहत को, उसकी यादों ने झिंझोड़ा है.. तब-तब मेरे आंसू बह निकले, जो दर्द हुआ क्या थोड़ा है..? जिस सख्स की खातिर घर - समाज, हर चीज को हमने छोड़ा है.. कैसे बताऊ ऐ दुनिया वालों, उसी सख्स ने दिल मेरा तोड़ा है.. मैं भूल उसे नहीं सकता अब, दिल बीच में बन गया रोड़ा है.. गुनेहगार तो मेरा ही दिल है, इसने ही उसे मुझसे जोड़ा है..