उसकी जुल्फों से छाँव हुई, दिल धूप में बड़ा बेचैन सा था..
ठोकर लगी फिर भी नहीं हटी नजर, वो जादू उसके नैन का था..
उसके हुस्न में डूब के हम, कुछ इस कदर उसके हो गए..
आज सोचता हूं सिर पीट के मैं, जीवन कितना सुख-चैन सा था..
उसकी जुल्फों से छाँव हुई, दिल धूप में बड़ा बेचैन सा था..
ठोकर लगी फिर भी नहीं हटी नजर, वो जादू उसके नैन का था..
उसके हुस्न में डूब के हम, कुछ इस कदर उसके हो गए..
आज सोचता हूं सिर पीट के मैं, जीवन कितना सुख-चैन सा था..
Kya ishq hi wajah thi
Ya kisi wajah se ishq tha
Tujhse door rehna Teri marzi thi
Door rehkar yaad karna mera ishq tha 💔
क्या ईश्क ही वजह थी
या किसी वजह से ईश्क था
तुझसे दूर रहना तेरी मर्जी थी
दूर रहकर याद करना मेरा ईश्क था 💔
Zakham….
Zakham mile bohut…. Phir bhi zinda hai….
Zakham ka hissab nahi….Phir bhi aage bade…
Zakham mile apno se….Phir bhi rishtedaari nibhayi…
Zaakham mile pyar mai… Phir bhi dobara pyar kia….
Zakham ki addat ho gai hai… Phir bhi marham bane….
Zakham ki koi dawa nhi hoti….bus yahi seekha humne…
Deepika Shankaran