Insaana di iss duniyaa vich bas ehi
ik rona hai
jajjbaat apne hon taan jajjbaat hi ne
je dujhe de hon tan khidaune hai
ਇਨਸਾਨਾਂ ਦੀ ਇਸ #ਦੁਨੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਸ ਏਹੀ
ਇੱਕ #ਰੋਣਾ ਹੈ।
ਜਜ਼ਬਾਤ ਆਪਣੇ ਹੋਣ ਤਾਂ #ਜਜ਼ਬਾਤ ਹੀ ਨੇ,
ਜੇ ਦੂਜੇ ਦੇ ਹੋਣ ਤਾਂ #ਖਿਡਾਉਣਾ ਹੈ।
Insaana di iss duniyaa vich bas ehi
ik rona hai
jajjbaat apne hon taan jajjbaat hi ne
je dujhe de hon tan khidaune hai
ਇਨਸਾਨਾਂ ਦੀ ਇਸ #ਦੁਨੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਸ ਏਹੀ
ਇੱਕ #ਰੋਣਾ ਹੈ।
ਜਜ਼ਬਾਤ ਆਪਣੇ ਹੋਣ ਤਾਂ #ਜਜ਼ਬਾਤ ਹੀ ਨੇ,
ਜੇ ਦੂਜੇ ਦੇ ਹੋਣ ਤਾਂ #ਖਿਡਾਉਣਾ ਹੈ।

Rawaa vich pathraan nu vekh ke
raahgir kade rukeyaa ni karde
duph jinni marzi tikhi charri howe
samunder kade sukeyaa ni karde
गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!