अंजाम समझती है आगाज नही समझती
ईशारे समझती है पूरी बात नही समझती
इक ऐसी लड़की पले पड़ी है यारो
मोहब्बत समझती है मुलाकात नही समझती
अंजाम समझती है आगाज नही समझती
ईशारे समझती है पूरी बात नही समझती
इक ऐसी लड़की पले पड़ी है यारो
मोहब्बत समझती है मुलाकात नही समझती
Koi ibadat ki chah mein roya,
Koi ibadat ki rah mein roya
Ajab h namaz-e- muhabbat ka silsila,
Koi qaza kr k roya, koi adaa kr k roya….🖤
तेरी हंसी मुरझाऐ फुलों को भी फिर से खिला दे,
जब झपकाऐ तु पलकें तो ,सुरज को भी ग्रहण लगा दे,
चाल तेरी ऐसी जैसे लहराती हो पीपल की डाल कोई,
और जब खुली हों तेरी जुल्फें तो काली घटा झा जाऐ!
बोल तेरे ऐसे जैसे जलेबी से चासनी टपक जाऐ,
क्या लिखुं तेरी खुबसुरती को तु है गणित का सवाल कोई!