Aksar Hum Apni Raat Yun Barbaad Karte Hain
Baith Ke Kisi Kone Me Unko Yaad Karte Hain
Unke Wapis Aane Ki Ummid Toh Chhod Di Kab Ki
Phir Bhi Na Jane Kyu Hum Apna Waqt Barbaad Karte Hain
Aksar Hum Apni Raat Yun Barbaad Karte Hain
Baith Ke Kisi Kone Me Unko Yaad Karte Hain
Unke Wapis Aane Ki Ummid Toh Chhod Di Kab Ki
Phir Bhi Na Jane Kyu Hum Apna Waqt Barbaad Karte Hain
ज़िन्दगी के लिए इक ख़ास सलीक़ा रखना
अपनी उम्मीद को हर हाल में ज़िन्दा रखना
उसने हर बार अँधेरे में जलाया ख़ुद को
उसकी आदत थी सरे-राह उजाला रखना
आप क्या समझेंगे परवाज़ किसे कहते हैं।
आपका शौक़ है पिंजरे में परिंदा रखना
बंद कमरे में बदल जाओगे इक दिन लोगो
मेरी मानो तो खुला कोई दरीचा रखना
क्या पता राख़ में ज़िन्दा हो कोई चिंगारी
जल्दबाज़ी में कभी पॉव न अपना रखना
वक्त अच्छा हो तो बन जाते हैं साथी लेकिन
वक़्त मुश्किल हो तो बस ख़ुद पे भरोसा रखना
वो हक हक की बात करके हकीकत से काफी दूर हो गए । उन्हें क्या मालूम था कि जिस हक की वो बात कर रहे हैं उस हक पर उनके अलावा किसी का हक जताने का भी हक नही है। ❤️