क्या इतना ही जरूरी है इश्क जताना
हर बात पे रूठे हुओ को मनाना
कुछ बाते अनकही भी कहे है
जरूरी नहीं होता है बात पे सर झुकाना
Enjoy Every Movement of life!
क्या इतना ही जरूरी है इश्क जताना
हर बात पे रूठे हुओ को मनाना
कुछ बाते अनकही भी कहे है
जरूरी नहीं होता है बात पे सर झुकाना
जो भी दुख याद न था याद आया; आज क्या जानिए क्या याद आया; याद आया था बिछड़ना तेरा; फिर नहीं याद कि क्या याद आया; हाथ उठाए था कि दिल बैठ गया; जाने क्या वक़्त-ए-दुआ याद आया; जिस तरह धुंध में लिपटे हुए फूल; इक इक नक़्श तेरा याद आया; ये मोहब्बत भी है क्या रोग जिसको भूले वो सदा याद आया।
