Rutaan badliyaa, raah badle, badl gaye ne ithon de lok
chhad dila, eh duniyaa tere matlab di ni
ithe per per te badl di e soch
ਰੁੱਤਾਂ ਬਦਲੀਆਂ, ਰਾਹ ਬਦਲੇ, ਬਦਲ ਗਏ ਨੇ ਇਥੋਂ ਦੇ ਲੋਕ
ਛੱਡ ਦਿਲਾ, ਇਹ ਦੁਨੀਆ ਤੇਰੇ ਮਤਲਬ ਦੀ ਨੀ
ਇਥੇ ਪੈਰ ਪੈਰ ਤੇ ਬਦਲ ਦੀ ਇ ਸੋਚ .. #GG
Rutaan badliyaa, raah badle, badl gaye ne ithon de lok
chhad dila, eh duniyaa tere matlab di ni
ithe per per te badl di e soch
ਰੁੱਤਾਂ ਬਦਲੀਆਂ, ਰਾਹ ਬਦਲੇ, ਬਦਲ ਗਏ ਨੇ ਇਥੋਂ ਦੇ ਲੋਕ
ਛੱਡ ਦਿਲਾ, ਇਹ ਦੁਨੀਆ ਤੇਰੇ ਮਤਲਬ ਦੀ ਨੀ
ਇਥੇ ਪੈਰ ਪੈਰ ਤੇ ਬਦਲ ਦੀ ਇ ਸੋਚ .. #GG
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।
Ranjha ranjha kardi ni me aape raanjha hoi
sadho ni mainu dhido raanjha, heer na aakho koi
Ranjha me vich me ranjhe vich, hor kyaal na koi
me nahi oh aap hai, aapni aap kare diljoi
Ranjha ranjha kardi ni me aape raanjha hoi
hath khoondhi mere aghe mangu, modhe bhoora loi
bullah heer saleti vekhe, kithe ja khaloi
Ranjha ranjha kardi ni me aape raanjha hoi
sadho ni mainu dhido raanjha, heer na aakho koi
ਰਾਂਝਾ ਰਾਂਝਾ ਕਰਦੀ ਨੀ ਮੈਂ ਆਪੇ ਰਾਂਝਾ ਹੋਈ
ਸੱਦੋ ਨੀ ਮੈਨੂੰ ਧੀਦੋ ਰਾਂਝਾ, ਹੀਰ ਨਾ ਆਖੋ ਕੋਈ
ਰਾਂਝਾ ਮੈਂ ਵਿੱਚ ਮੈਂ ਰਾਂਝੇ ਵਿੱਚ, ਹੋਰ ਖ਼ਿਆਲ ਨਾ ਕੋਈ
ਮੈਂ ਨਹੀਂ ਉਹ ਆਪ ਹੈ, ਆਪਣੀ ਆਪ ਕਰੇ ਦਿਲਜੋਈ
ਰਾਂਝਾ ਰਾਂਝਾ ਕਰਦੀ ਨੀ ਮੈਂ ਆਪੇ ਰਾਂਝਾ ਹੋਈ
ਹੱਥ ਖੂੰਡੀ ਮੇਰੇ ਅੱਗੇ ਮੰਗੂ, ਮੋਢੇ ਭੂਰਾ ਲੋਈ
ਬੁੱਲ੍ਹਾ ਹੀਰ ਸਲੇਟੀ ਵੇਖੋ, ਕਿੱਥੇ ਜਾ ਖਲੋਈ
ਰਾਂਝਾ ਰਾਂਝਾ ਕਰਦੀ ਨੀ ਮੈਂ ਆਪੇ ਰਾਂਝਾ ਹੋਈ
ਸੱਦੋ ਨੀ ਮੈਨੂੰ ਧੀਦੋ ਰਾਂਝਾ, ਹੀਰ ਨਾ ਆਖੋ ਕੋਈ