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Birbal story in hindi

बीरबल कहाँ मिलेगा     

एक दिन बीरबल बाग में टहलते हुए सुबह की ताजा हवा का आनंद ले रहा था कि अचानक एक आदमी उसके पास आकर बोला, “क्या तुम मुझे बता सकते हो कि बीरबल कहां मिलेगा ?”

“बाग में।” बीरबल बोला।

वह आदमी थोड़ा सकपकाया लेकिन फिर संभलकर बोला, “वह कहां रहता है ?”

“अपने घर में।” बीरबल ने उत्तर दिया।

हैरान-परेशान आदमी ने फिर पूछा, “तुम मुझे उसका पूरा पता ठिकाना क्यों नहीं बता देते ?”

“क्योंकि तुमने पूछा ही नहीं।” बीरबल ने ऊंचे स्वर में कहा।

“क्या तुम नहीं जानते कि मैं क्या पूछना चाहता हूं ?” उस आदमी ने फिर सवाल किया।

“नहीं।’ बीरबल का जवाब था।

वह आदमी कुछ देर के लिए चुप हो गया, बीरबल का टहलना जारी था। उस आदमी ने सोचा कि मुझे इससे यह पूछना चाहिए कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ? वह फिर बीरबल के पास जा पहुंचा, बोला, “बस, मुझे केवल इतना बता दो कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ?” “हां, मैं जानता हूं।” जवाब मिला।

“तुम्हारा क्या नाम है ?” आदमी ने पूछा।

“बीरबल।” बीरबल ने उत्तर दिया।

अब वह आदमी भौचक्का रह गया। वह बीरबल से इतनी देर से बीरबल का पता पूछ रहा था और बीरबल था कि बताने को तैयार नहीं हुआ कि वही बीरबल है। उसके लिए यह बेहद आश्चर्य की बात थी।

“तुम भी क्या आदमी हो…” कहता हुआ वह कुछ नाराज सा लग रहा था, “मैं तुमसे तुम्हारे ही बारे में पूछ रहा था और तुम न जाने क्या-क्या ऊटपटांग बता रहे थे। बताओ, तुमने ऐसा क्यों किया ?”

“मैंने तुम्हारे सवालों का सीधा-सीधा जवाब दिया था, बस !”

अंततः वह आदमी भी बीरबल की बुद्धि की तीक्ष्णता देख मुस्कराए बिना न रह सका।

Title: Birbal story in hindi

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Fazool jehi na samjhi || Punjabi status attitude

Cool jeha subaah teri mutiyaar da
fool jeha na samjhi
lakhan vichon ik haa
fazool jehi na samjhi

Cool ਜਿਹਾ ਸੁਭਾਅ ਤੇਰੀ ਮੁਟਿਆਰ ਦਾ #
Fool ਜਿਹੀ ਨਾ ਸਮਝੀ #
ਲਖਾਂ ਵਿਚੋ ਇਕ ਹਾ #
ਫਜੂਲ ਜਿਹੀ ਨਾ ਸਮਝੀ...

Title: Fazool jehi na samjhi || Punjabi status attitude


Nafrat ka bhav || hindi ghaint pyar shayari

नफ़रत का भाव ज्यों ज्यों खोता चला गया,
मैं रफ्ता रफ्ता आदमी होता चला गया।

फिर हो गया प्यार की गंगा से तर बतर,
गुजरा जिधर से सबको भिगोता चला गया।

सोचा हमेशा मुझसे किसी का बुरा न हो,
नेकी हुई तो दरिया में डुबोता चला गया।

कटुता की सुई लेके खड़े थे जो मेरे मीत,
सद्भावना के फूल पिरोता चला गया।

जितना सुना था उतना जमाना बुरा नहीं,
विश्वास अपने आप पर होता चला गया।

अपने से ही बनती है बिगड़ती है ये दुनियां,
मैं अपने मन के मैल को धोता चला गया।

उपजाऊ दिल है बेहद मेरे शहर के लोग,
हर दिल में बीज प्यार का बोता चला गया।...

Title: Nafrat ka bhav || hindi ghaint pyar shayari