ਅੱਜ ਚੰਨ ਵੀ ਇਕੱਲਾ, ਤਾਰਿਆਂ ਦੀ ਬਾਰਾਤ ਵਿੱਚ
ਪਰ ਦਰਦ ਚੰਨ ਦਾ ਇਹ ਚੰਦਰੀ ਰਾਤ ਨਾ ਸਮਝੇ
ਅੱਜ ਚੰਨ ਵੀ ਇਕੱਲਾ, ਤਾਰਿਆਂ ਦੀ ਬਾਰਾਤ ਵਿੱਚ
ਪਰ ਦਰਦ ਚੰਨ ਦਾ ਇਹ ਚੰਦਰੀ ਰਾਤ ਨਾ ਸਮਝੇ
सोचू तेरे बारे में तो इतना मैं मुस्कुराऊ,
सामने जब तू आए तो कभी नजरों को रोकू,
तो कभी दिल को समझाऊं,
नादान है ये दिल ज़रा की मानता ही नहीं है,
सब कुछ जानने के भी बाद भी,
ये कुछ जानता हि नहीं है,
कभी खुद को संभालू तो कभी खुद को समझाऊं,
क्यों हर दिन और मैं तेरे जैसा होता जाउ,
ख्याल तेरा जब भी आए,
न जाने क्यों मैं फिर सो ना पाउं,
कभी खुद को रोकू तो कभी दिल को समझाऊं !
आ भर लूं तुझे आंखों के प्यालों में,
कहीं और जाने दूं तो कैसे...
कोशिशें तो करता हूं हरपल,
आंखो में नमी आने दूं तो कैसे...
वो दौर भी इश्क़ का आकर
गुज़र गया इक लम्हा हो जैसे...
सिमट जाऊंगा सुलगती चंद लकड़ियों में
पर तेरे कानों तक ये बात जाने दूं तो कैसे...