दिल का हर अरमान उठा कर चली गई
अपना सब सामान उठा कर चली गई
आंखो में इक चांद सा चेहरा आया और!
सांसों में तूफान उठा कर चला गया!!
हर्ष ✍️
दिल का हर अरमान उठा कर चली गई
अपना सब सामान उठा कर चली गई
आंखो में इक चांद सा चेहरा आया और!
सांसों में तूफान उठा कर चला गया!!
हर्ष ✍️
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
उठता है तूफान सीने में जब
जहन में सवाल इक आता है
जब जाना ही है दूर तो
क्यों करीब कोई आता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
जिसे देखना भी नही मुनासिब
आंखे बंद कर करीब उसी को पता है
ढूंढ ले खामियां उसकी हजार पर
दिल तो आज भी बेहतर उसी को बताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
सपने देखता है नई दुनिया बसाने के तू
नींद तेरी आज भी वही चुराता है
बेख्याल होने का करले तमसील भले
मिलने का ख्याल तो आज भी सताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….