एक ना एक दिन तुमसे करेगा कोई गद्दारी,
तब तुम सोचोगे,
कहा गई उसकी वफादारी,
तब तुम बोलोगे,
बेकार है यह दुनिया सारी,
और तब तुम जानोगे दुनियादारी।💯
एक ना एक दिन तुमसे करेगा कोई गद्दारी,
तब तुम सोचोगे,
कहा गई उसकी वफादारी,
तब तुम बोलोगे,
बेकार है यह दुनिया सारी,
और तब तुम जानोगे दुनियादारी।💯
इस जीवन से जुड़ा एक सवाल है हमारा~
क्या हमें फिर से कभी मिलेगा ये दोबारा?
समंदर में तैरती कश्ती को मिल जाता है किनारा~
क्या हम भी पा सकेंगे अपनी लक्ष्य का किनारा?
जिस तरह पत्तों का शाखा है जीवन भर का सहारा~
क्या उसी तरह मेरा भी होगा इस जहां में कोई प्यारा?
हम एक छोटी सी उदासी से पा लेते हैं डर का अंधियारा~
गरीब कैसे सैकड़ों गालियां खा कर भी कर लेतें है गुजारा ?
जिस तरह आसमान मे रह जाते सूरज और चांद-तारा ~
क्या उस तरह रह पाएगा हमारी दोस्ती का सहारा ?
जैसे हमेशा चलती रहती है नदियों का धारा~
क्या हम भी चल सकेंगे अपनी राह की धारा ?
Socha tha humne bhi
Milenge kabhi kisi mod par,
Par kya kare nhi hota bharosa kisi par
Yaara jabse gya tu chhod kar! 🥀