तुम कहते तो तुम्हए फिक्र है हमारी,
फिर क्यों तुम्हारी बातों मे हमारा जिक्र नहीं।
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तुम कहते तो तुम्हए फिक्र है हमारी,
फिर क्यों तुम्हारी बातों मे हमारा जिक्र नहीं।

Ful kina hi sohna howe
tareef ohdi khusbu ton hundi aa
insaan jine marzi ambar chhoh le
kadar ohdi gunaa ton hundi aa
मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने
ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैं ने
अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैं ने
उन्हें अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है
कि कुछ मुद्दत हसीं ख़्वाबों में खो कर जी लिया मैं ने
बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो
बहुत दुख सह लिए मैं ने बहुत दिन जी लिया मैं ने