तुम कहते तो तुम्हए फिक्र है हमारी,
फिर क्यों तुम्हारी बातों मे हमारा जिक्र नहीं।
Enjoy Every Movement of life!
तुम कहते तो तुम्हए फिक्र है हमारी,
फिर क्यों तुम्हारी बातों मे हमारा जिक्र नहीं।
बेवक्त बेवजह तुझसे बात करना सुकून लाता है
मेरे लड़खड़ाते अल्फ़ाज़ों मे एक जूनून लाता है
मैं रूठ जाऊ जमाने से कोई गीला नहीं
फिर मासूमियत भरा तेरा हाल पूछना याद आता है ,
कभी बिखरू तो आके समेट लेना मुझे
तुम जो रूठे मुझसे तो मुझे सीधा शमशान याद आता है ।
कुछ बोलूं तो इतराते बहुत हो,
जानेमन तुम मुस्कुराते बहुत हो,
मन करता है तुम्हे दावत पर बुलाऊँ,
लेकिन जानेमन तुम खाते बहुत हो।