

हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..
Chalane wale hathon se patwar, choot jaya karti hai..
Aschi se aschi kashtiyan bhi lehron mein, toot jaya karti hai..
Kisi taraf kinara dikhayi nahi deta..
Jab kismat sath na de, aur takdeer rooth jaya karti hai..💔
चलाने वाले हाथों से पतवार, छूट जाया करती है..
अच्छी से अच्छी कश्तियां भी लैहरों में, टूट जाया करती हैं..
किसी तरफ़ किनारा दिखाई नहीं देता..
जब किस्मत साथ ना दे, और तकदीर रूठ जाया करती है..💔