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hoon aksar phareb || Jabardast hindi shayari

kuchh is tarah se vafa kee misaal deta hu,
savaal karata hai koee to taal deta hu,
usee se khaata hoon aksar phareb manjil ka,
main jisake paanv se kaanta nikaal deta hu…

कुछ इस तरह से वफ़ा की मिसाल देता हु,
सवाल करता है कोई तो टाल देता हु,
उसी से खाता हूँ अक्सर फरेब मंजिल का,
मैं जिसके पाँव से काँटा निकाल देता हु…

Title: hoon aksar phareb || Jabardast hindi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Mohobbat || hindi shayari collection

Khwabon mein aate ho tum
yaadon mein aate ho tum
jahan mein jau jahan mein dekhu
mujhe nazar aate ho tum..!!
ख्वाबों में आते हो तुम
यादों में आते हो तुम
यहाँ मैं जाऊं यहाँ मैं देखूं
मुझे नज़र आते हो तुम..!!

Aankhon me rahne walo ko yaad nahi karte,
Dil me rehne walo ki baat nahi karte,
Hamari to ruh me bus gaye hain aap,
Tabhi to hum milne ki fariyaad nahi karte..!!
आंखों में रहने वालों को याद नहीं करते
दिल में रहने वालों की बात नहीं करते
हमारी तो रूह में बस गए हैं आप
तभी तो हम मिलने की फरियाद नहीं करते..!!

Kuch nasha teri baat ka hai
Kuch nasha dhimi barsaat ka hai
Hum to kabse nashe me dub jaane ko tayyar hai
Intezar to sirf aapki mulakat ka hai..!!
कुछ नशा तेरी बात का है
कुछ नशा धीमी बरसात का है
हम तो कब से नशे में डूब जाने को तैयार है
इंतज़ार तो सिर्फ आपकी मुलाकात का है..!!

Mulakat maut ki mehman ban gayi hai
Nazar ki duniya veeran ban gayi hai
Meri sans bhi ab meri nahi rahi
Ye zindagi aapki mohabbat par kurban ho gayi hai..!!
मुलाकात मौत की मेहमान बन गई है
नज़र की दुनियां वीरान बन गई है
मेरी साँस भी अब मेरी नहीं रही
ये ज़िन्दगी आपकी मोहोब्बत पर कुरबान हो गई है..!!

Title: Mohobbat || hindi shayari collection


Phoolo ne kabhi || Shayari

फूलों ने कभी तोड़ने का दर्द कहा है,
कांटों ने ही हमेशा दुश्मनी निभाई है;
मोहब्बत भी फना का ही एक और नाम है,
यह रूसवा तो​ हुई है, पर इसने हमेशा वफादारी निभाई है।

ऐ चांद तेरे आने का सबब सबको मालूम नहीं,
कुछ लोग दिया जलाते हैं, और कुछ दिल जलाते हैं;
या वो अच्छी हैं या बुरी, हसरतें तो अपनी हैं,
मगर लोग अक्सर दाग तुझ पर लगाते हैं।

ऐ मेरे दोस्त तू समन्दर बन जा,
क्या खोया क्या पाया इसकी चाहत न कर;
तेरे अंदर ही एक मुकम्मल जहां है,
तू बाहर से किसी और की आस न कर।

मुमकिन है कि मंजिलें मुझसे दूर बहुत हैं,
पर रास्ते पर चलना मेरी फितरत बन गयी है;
उजाले समेटने में कोई वाहवाही नहीं,
अन्धेरों में रोशनी करना मेरी आदत बन गयी है।

ऐसे चलो कि चल के फिर गिरना न पड़े,
इतना उठो कि उठ के फिर झुकना न पड़े;
लेकिन गिरना, उठना तेरे बस में नहीं ऐ दोस्त,
इसलिए उसका हाथ पकड़ के चलो कि फिर रोना न पड़े।

मां के हाथों की बरकत का अंदाजा इस से हो गया,
थी एक वक्त की रोटी हर रोज,
और तीस वर्ष तक गुजारा हो गया;
आज रोटी तो है हर वक्त की, लेकिन वो वक्त कहीं पर खो गया।

ऐ जिंदगी, ये तेरे सवाल की तारीफ नहीं,
यह मेरे जवाब का हुनर कि जिंदगी की उलझने सुलझती चली गयीं;
मैं तो बस अपने दिल की कह रहा था,
और कहानियां बनती चली गयीं।

न थी जिंदगी से शिकायत,
न वक्त से कुछ गिला था;
जो मुझको नहीं मिला,
वो खुद मेरा ही सिला था;
मदद-ओ-मशवरे कम नहीं थे मददगारों के,
पर अफसोस जो तकदीर ने दिया था वह दर्द ही मुझे मिला था।

ऐ वतन कर्ज तो तेरा मैं जब उतारूं, जब मेरे पास कुछ अपना भी हो; तेरी मिट्टी, तेरा पानी, तेरी हवा, तेरी धूप, तेरी छांव, तेरी रोटी और नाम तेरा, फिर भी बस एक कतरा ही बन पाउं तेरा, तो मैं समझूं और तुझको मैं अपना पुकारूं।

जिंदगी जीने का अंदाज तो आया मगर अफसोस,
वो मुकम्मल एहसास नहीं आया;
वो हुनर तो आया मगर,
ऐ बदनसीबी वो मुकाम कभी नहीं आया।

यूं गलतफहमियां पाला न करो,कभी आईने में खुद को निहारा भी करो; ये जो चेहरा है वो सब कुछ बयां कर देता है; कभी इसको जुबां पर उतारा भी करो।

आशुतोष श्रीवास्तव

Title: Phoolo ne kabhi || Shayari