Jaan kaddan te aunda e meri
Haye tera menu jaan kehna..!!
ਜਾਨ ਕੱਢਣ ਤੇ ਆਉਂਦਾ ਏ ਮੇਰੀ
ਹਾਏ ਤੇਰਾ ਮੈਨੂੰ ਜਾਨ ਕਹਿਣਾ..!!
Jaan kaddan te aunda e meri
Haye tera menu jaan kehna..!!
ਜਾਨ ਕੱਢਣ ਤੇ ਆਉਂਦਾ ਏ ਮੇਰੀ
ਹਾਏ ਤੇਰਾ ਮੈਨੂੰ ਜਾਨ ਕਹਿਣਾ..!!
मान लिखूँ सम्मान लिखूँ मैं।
आशय और बखान लिखूं मैं।
जिस नारी पर दुनिया आश्रित,
उसका ही बलिदान लिखूँ मैं।।
जीवन ऐसी बहती धारा,
जिसका प्यासा स्वयं किनारा,
पत्थर पत्थर अश्क उकेरे,
अधरों पर मुस्कान लिखूँ मैं।
मान——
कोमल है कमज़ोर नहीं है,
नारी है यह डोर नहीं है,
मनमर्ज़ी इसके संग करले
इतना कब आसान लिखूँ मैं
मान—-
बेटा हो या बेटी प्यारी,
जन्म सभी को देती नारी,
इसका अन्तस् पुलकित कोमल
इसके भी अरमान लिखूँ मैं
मान—-
हिम्मत से तक़दीर बदल दे,
मुस्कानों में पीर बदल दे,
प्रेम आस विश्वास की मूरत,
शब्द शब्द गुणगान लिखूँ मैं
मान——
बीत गया जो सुनहरा वक्त,
बंद आंखों में ठहरा नज़र आता है…
जिस भी पत्थर पर सर झुकाया ,
बस तेरा चेहरा नज़र आता है…
वो गालों पर हाथ रखना तेरा,
आंखों में आंखें डाल देखना तेरा,
चुभने लगी है वो यादें तेरी,
हर इक लम्हे में अब पहरा नज़र आता है…💔