jhuthe husn/bewafa shayari
Bach k rho ehna husna ton yaaro
Eh jaan jaan keh k hi jaan lende ne..
बिखरे हुए हैं शब्द मेरे, जैसे एक टूटा हुआ साज हूँ,
नि:शब्द हूँ मैं जैसे एक दबी आवाज़ हूँ ,
लिख रहा हूँ मैं अपना दर्द स्याही में,
जैसे कोई अनकही बात हूँ ,
लोगों ने करी है मेरी तारीफ़ें, जैसे मै उनके सर का ताज हूँ ,
नज़रें थी तेज मेरी इस कदर, जैसे मै बाज़ हूँ ,
बीता वो कल जिसमें मिले धोखे मुझे, आज बीता कल भी तरस खाता है मुझपे, जो मैं आज हूँ,
शांत हूँ मैं इन चालाकों के झुंड में, क्यूँकि मैं आने वाले तूफ़ान का आग़ाज़ हूँ ,
जो थे मेरे साथ जब अकेला था मैं, मैं आने वाले कल में भी उनके साथ हूँ ,
और जो सोचते थे कि गिरूँगा मैं लड़खड़ाते हुए ज़िंदगी में, उनके लिए एक बुरा ख़्वाब हूँ ,
सपनो को अपने मैं लेकर उडूँगा एक दिन,
जैसे हवा को चीरता हुआ जहाज़ हूँ ,
पर फ़िलहाल बिखरा हुआ शब्द हूँ, एक टूटा हुआ साज हूँ ।।
Tainu paun lai me ladhda reha jamane naal
tainu paun lai ladhda rehai me takdeera naal
preet pyaar te chaa adhora reh gaue mere
bhai roope waleyaa muk jaane jo sareer de naal
ਤੈਨੂੰ ਪਾਉਣ ਲਈ ਮੈਂ ਲੜਦਾ ਰਿਹਾ ਜਮਾਨੇ ਨਾਲ
ਤੈਨੂੰ ਪਾਉਣ ਲਈ ਲੜਦਾ ਰਿਹਾ ਮੈਂ ਤਕਦੀਰਾਂ ਨਾਲ
ਪ੍ਰੀਤ ਪਿਆਰ ਤੇ ਚਾਅ ਅਧੂਰਾ ਰਹਿ ਗਏ ਮੇਰੇ
ਭਾਈ ਰੂਪੇ ਵਾਲਿਆ ਮੁੱਕ ਜਾਣੇ ਜੋ ਸਰੀਰਾਂ ਦੇ ਨਾਲ