Je nibhauna na hove
fir dil nhio layida,
Ene sare khaab dikha ke
chad ke nhio jayida,
Jihne nibhauna hove
marde dam tak nibha jande ne,
Jihne chadna hove
majboori keh ke
palla chda jande ne…
Je nibhauna na hove
fir dil nhio layida,
Ene sare khaab dikha ke
chad ke nhio jayida,
Jihne nibhauna hove
marde dam tak nibha jande ne,
Jihne chadna hove
majboori keh ke
palla chda jande ne…
हमने डूबते सूरज की एक शाम को अपना किरदार बदल डाला,
के उस मोहब्बत की चुभन को शायरी का नजमा दे डाला,
लोग मेरी तकरीरों पर वाह वाही दे रहे थे,
भीड़ में कुछ लोग ताली बजाकर, तो कुछ लोग अपनी नाकाम मोहब्बत की दलील दे रहे थे।
महफिल के शोर से एक जानी पहचानी सी आवाज आई,
तू आज भी आगे नहीं बढ़ा की उसने गुहार लगाई,
उसकी इस शिकायत में परवान था पुराने यारो का ।
मै हैरान था कौन था यह शक्स
अनजानों की भीड़ में जिसने मेरे शब्दो में छुपी नाकाम मोहब्बत को पहचाना था,
मुस्कुराता हुआ सामने आया तब समझ आया अरे यह तो यार पुराना था।