Oh Mann da kyu mai tu dillan ohde chitt vich chor aa..
Jihnu apni jind jaan banyai firda ohde ohda tan yaar hi koi hor aaa
Oh Mann da kyu mai tu dillan ohde chitt vich chor aa..
Jihnu apni jind jaan banyai firda ohde ohda tan yaar hi koi hor aaa

कभी उसकी यादें ठहर जाती हैं आकर, कभी टकराकर चली जाती हैं..
कभी गमों में डूबाये रखती हैं मुझे, कभी हंसाकर चली जाती हैं..
आज भी वो मेरे आस-पास है, कभी ये अहसास दिलाकर चली जाती है..
कभी एक झलक उसकी पाने को तरसूं, दिल जला कर चली जाती है..
उसका सपनों में आना-जाना यूं है जैसे, झपकी आकर चली जाती है..
मैं सुकून भरी नींद के इंतजार में होता हूं, सबको आकर चली जाती है..