Kali raate shikhar hanera
khamoshi da pehra e
teri yaad mere hanjhu
ina da rishta gehra hai
काली राते शिखर हनेरा
खामोशी दा पहरा ऐ
तेरी याद मेरे हंजू
इना दा रिश्ता गहरा ऐ
Kali raate shikhar hanera
khamoshi da pehra e
teri yaad mere hanjhu
ina da rishta gehra hai
काली राते शिखर हनेरा
खामोशी दा पहरा ऐ
तेरी याद मेरे हंजू
इना दा रिश्ता गहरा ऐ
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,
फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,
एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी
हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,
मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख्त तूने,
वो हँसी और बोली- मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सिखा रही थी।