कहां था ना बदल जाओगे, इस वक़्त की तरह
मगर ईतना तो, यह वक़्त भी नहीं बदला
जीतना तुम बदल गए।
Enjoy Every Movement of life!
कहां था ना बदल जाओगे, इस वक़्त की तरह
मगर ईतना तो, यह वक़्त भी नहीं बदला
जीतना तुम बदल गए।
ज़िन्दगी के अंजान सफर में निकल के देखूंगा,
ये मौत का दरिया है तो चल के देखूंगा...
सवाल ये है कि रफ्तार किसकी कितनी है,
मैं हवाओं से आगे निकल कर देखूंगा...
इक मज़ाक अच्छा रहेगा चांद तारों से,
मैं आज शाम से पहले ढल कर देखूंगा...
रोशनी बाटने वालों पर क्या गुजरती है,
आज मैं इक चिराग़ की तरह जल कर देखूंगा...
Kuch is trah baat khatam ki humne
Acha chlo baat karte hain
Aur fir kabhi baat nhi ki humne💔
कुछ इस तरह बात खत्म की हमने
अच्छा चलो फिर बात करते है
और फिर कभी बात नही की हमने💔