कहां था ना बदल जाओगे, इस वक़्त की तरह
मगर ईतना तो, यह वक़्त भी नहीं बदला
जीतना तुम बदल गए।
कहां था ना बदल जाओगे, इस वक़्त की तरह
मगर ईतना तो, यह वक़्त भी नहीं बदला
जीतना तुम बदल गए।
मैं मुकम्मल होके भी अधूरा ही रहा हु ,
तमाम आजमइशों के बाद भी अकेला ही रहा हु ।
मैं हर बार करता रहा जिसकी हसी की दुआ
बदले मे इसके हर बार रोता रहा हूँ ।
हर बार बेवजह रूठता है कोई मुझसे
लाख कोशिशों के बाद भी खुद को खोटा रहा हूँ ।
मेरी कोशीशे मिटा रही है तमाम जख्मो को मेरे ,
दूसरी तरफ जज़बातो की आड़ मे एनहे खुरेद रहा हूँ ।
Dhoond raha hu fir use,
Kahi to koi uska zikr kare ❤️
Fir mujhe uska khayal aaye
Dil fir uski fikr kare…😍
ढूंढ रहा हूं फिर उसे,
कहीं तो कोई उसका ज़िक्र करे,❤️
फिर मुझे उसका खयाल आए,
दिल फिर उसकी फिक्र करें…😍