कई मुलाक़ातों के बाद आख़िर, ये मुलाक़ात आई है..
आएगी फिर से सुकून भरी नींद, फिर वो रात आई है..
हम सोऐ नहीं ना जाने कब से, आराम अधूरा है..
मेरी राहत की साँसें वो देखो मेरी जान, अपना साथ लाई है..
कई मुलाक़ातों के बाद आख़िर, ये मुलाक़ात आई है..
आएगी फिर से सुकून भरी नींद, फिर वो रात आई है..
हम सोऐ नहीं ना जाने कब से, आराम अधूरा है..
मेरी राहत की साँसें वो देखो मेरी जान, अपना साथ लाई है..
तिश्नगी थी मुलाक़ात की,
उस से हाँ मैंने फिर बात की।
दुश्मनी मेरी अब मौत से,
ज़िंदगी हाथ पे हाथ की।
सादगी उसकी देखा हूँ मैं,
हाँ वो लड़की है देहात की।
तुमने वादा किया था कभी,
याद है बात वो रात की।
अब मैं कैसे कहूँ इश्क़ इसे,
बात जब आ गई ज़ात की।
मुझसे क्या दुश्मनी ऐ घटा,
क्यों मेरे घर पे बरसात की।
हमको मालिक ने जितना दिया,
सब ग़रीबों में ख़ैरात की।
तू कभी मिल तो मालूम हो,
क्या है औक़ात औक़ात की।
Ishq e teri kiitii hoyi ibadat naal..!!
Beintehaa e teri har ikk aadat naal..!!
ਇਸ਼ਕ ਏ ਤੇਰੀ ਕੀਤੀ ਹੋਈ ਇਬਾਦਤ ਨਾਲ..!!
ਬੇਇੰਤੇਹਾ ਏ ਤੇਰੀ ਹਰ ਇੱਕ ਆਦਤ ਨਾਲ..!!