तुझसे रु-बरू होकर भी अपना, हाले-दिल तुझे बताया नहीं..
आँखों के आइने मैं तेरा चेहरा था, कभी तुझे जताया नहीं..
प्यार का चश्मा आखों पर था, जानके भी उसे हटाया नहीं..
कई नजरों में एक नजर मेरी भी थी, चाह कर भी तुझे पटाया नहीं..
तुझसे रु-बरू होकर भी अपना, हाले-दिल तुझे बताया नहीं..
आँखों के आइने मैं तेरा चेहरा था, कभी तुझे जताया नहीं..
प्यार का चश्मा आखों पर था, जानके भी उसे हटाया नहीं..
कई नजरों में एक नजर मेरी भी थी, चाह कर भी तुझे पटाया नहीं..
Chand mein baithkar subah ka intzaar karta hu
Thoda kal sochkar aaj izhaar karta hu
Jab bhi meri nadaniyon ne galti karne ki izazat di hai
Tab mere bure waqt ne bhi meri hifazat ki hai..
चांद में बैठकर सुबह का इंतज़ार करता हूं,
थोड़ा कल सोचकर आज इजहार करता हूं…
जब भी मेरी नादानियो ने गलती करने की इजाज़त दी है,
तब मेरे बुरे वक्त ने भी हमेशा मेरी हिफाज़त की है…
Baithe the apni mauj mein achanak ro padhe
Yun aakar tere khayal ne ascha nhi kiya❤️🩹
बैठे थे अपनी मौज में अचानक रो पड़े
यू आकर तेरे ख्याल ने अच्छा नहीं किया❤️🩹