तुझसे रु-बरू होकर भी अपना, हाले-दिल तुझे बताया नहीं..
आँखों के आइने मैं तेरा चेहरा था, कभी तुझे जताया नहीं..
प्यार का चश्मा आखों पर था, जानके भी उसे हटाया नहीं..
कई नजरों में एक नजर मेरी भी थी, चाह कर भी तुझे पटाया नहीं..
तुझसे रु-बरू होकर भी अपना, हाले-दिल तुझे बताया नहीं..
आँखों के आइने मैं तेरा चेहरा था, कभी तुझे जताया नहीं..
प्यार का चश्मा आखों पर था, जानके भी उसे हटाया नहीं..
कई नजरों में एक नजर मेरी भी थी, चाह कर भी तुझे पटाया नहीं..
Zid to motiyon ki hoti hai bikhar jane ki
Humne to dhage mein apne mohobbat piroya hai…❣️
ज़िद तो मोतियों की होती है बिखर जाने की
हमने तो धागे में अपने मोहब्बत पिरोया है…❣️
एक बचपन का जमाना था
जहाँ खुशियों का खजाना था
चाहत चांद को पाने कि थी
पर दिल तितली का दिवाना था
ना खबर अपनी थी
ना शाम का ठिकाना था
माँ की कहानी थी
परियों का फसाना था
क्यो हो गए आज हम इतने बड़े
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था❤️