तुझसे रु-बरू होकर भी अपना, हाले-दिल तुझे बताया नहीं..
आँखों के आइने मैं तेरा चेहरा था, कभी तुझे जताया नहीं..
प्यार का चश्मा आखों पर था, जानके भी उसे हटाया नहीं..
कई नजरों में एक नजर मेरी भी थी, चाह कर भी तुझे पटाया नहीं..
तुझसे रु-बरू होकर भी अपना, हाले-दिल तुझे बताया नहीं..
आँखों के आइने मैं तेरा चेहरा था, कभी तुझे जताया नहीं..
प्यार का चश्मा आखों पर था, जानके भी उसे हटाया नहीं..
कई नजरों में एक नजर मेरी भी थी, चाह कर भी तुझे पटाया नहीं..
तुझे देखने की ख्वाहिश ले के घर से तो निकल पड़ता हूँ…
यही सोच के कि तू आज मिलेगी जरूर…
पर इस दिल को क्या पता है… कि तू उसे भूल चुकी हैं…
यूँ तो तेरा हर बार का मुस्कुराना इन
हवाओं और फिज़ाओ में बसा हैं…
ये हवा जब भी तुझे छूकर गुजरती है…
ना चाहते हुए भी तू याद आ ही जाती है।
Me Vekhiyaa lokan nu
roj nawa din manaunde hoye
3 saal ho gaye
fir koi din mere lai kyu na chadeyaa
ਮੈਂ ਵੇਖਿਆ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ
ਰੋਜ ਨਵਾਂ ਦਿਨ ਮਨਾਉਂਦੇ ਹੋਏ
੩ ਸਾਲ ਹੋ ਗਏ
ਫਿਰ ਕੋਈ ਦਿਨ ਮੇਰੇ ਲਈ ਕਿਉਂ ਨਾ ਚੜਿਆ