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kai nazro me ek nazar meri bhi thi

तुझसे रु-बरू होकर भी अपना, हाले-दिल तुझे बताया नहीं..
आँखों के आइने मैं तेरा चेहरा था, कभी तुझे जताया नहीं..
प्यार का चश्मा आखों पर था, जानके भी उसे हटाया नहीं..
कई नजरों में एक नजर मेरी भी थी, चाह कर भी तुझे पटाया नहीं..

Title: kai nazro me ek nazar meri bhi thi

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Sacha dost || dil jamaa saaf e ohda

  • ਦਿਲ ਜਮਾਂ ਸਾਫ਼ ਏ ਓਹਦਾ
  • ਗੱਲਾਂ ਗੱਲਾਂ ਵਿਚ ਗੱਲ ਡੂੰਘੀ ਕਰ ਜਾਂਦਾ ਏ
  • ਹੈਗਾ ਏ ਇਕ ਸੱਜਣ ਸਾਡਾ
  • ਜਮਾਂ ਰੱਬ ਦੇ ਹਾਣ ਦਾ ਏ
  • ਕਰਦਾ ਏ ਹਰ ਗੱਲ ਸਾਂਝੀ ਮੇਰੇ ਨਾਲ
  • ਓ ਕਦੇ ਕੁਝ ਲੁਕਾ ਨਹੀਂ ਰਖਦਾ
  • ਓ ਸਾਦਗੀ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸੋਹਣਾ ਲਗਦਾ ਏ
  • ਸ਼ੀਸ਼ਾ ਵੀ ਉਹਨੂੰ ਦੇਖ ਏ ਸੰਘਦਾ
  • ਸਾਰੀ ਕਾਇਨਾਤ ਓਹਦੇ ਮੂਹਰੇ ਝੁੱਕ ਜਾਂਦੀ ਏ
  • ਜਦੋ ਨੀਵੀਂ ਪਾ ਕੇ ਹੱਸਦਾ ਏ ਦੁਨੀਆਂ ਰੁਕ ਜਾਂਦੀ ਏ
  • ਓ ਸੋਹਣਾ ਏ ਬੇਸ਼ੱਕ
  • ਓਦੋਂ ਵੀ ਸੋਹਣਾ ਓਹਦਾ ਨਾਂ ਏ
  • ਮੈਂ ਦੇਖਿਆ ਨਹੀਂ ਰੱਬ ਨੂੰ ਕਦੇ
  • ਮੇਰੇ ਲਈ ਓਹੀ ਰੱਬ ਦੀ ਥਾਂ ਏ

Title: Sacha dost || dil jamaa saaf e ohda


माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry

पहली धड़कन भी मेरी धडकी थी तेरे भीतर ही,
जमी को तेरी छोड़ कर बता फिर मैं जाऊं कहां.

आंखें खुली जब पहली दफा तेरा चेहरा ही दिखा,
जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सीखा.

खामोशी मेरी जुबान को  सुर भी तूने ही दिया,
स्वेत पड़ी मेरी अभिलाषाओं को रंगों से तुमने  भर दिया.

अपना निवाला छोड़कर मेरी खातिर तुमने भंडार भरे,
मैं भले नाकामयाब रही फिर भी मेरे होने का तुमने अहंकार भरा.

वह रात  छिपकर जब तू अकेले में रोया करती थी,
दर्द होता था मुझे भी, सिसकियां मैंने भी सुनी थी.

ना समझ थी मैं इतनी खुद का भी मुझे इतना ध्यान नहीं था,
तू ही बस वो एक थी, जिसको मेरी भूख प्यार का पता था.

पहले जब मैं बेतहाशा धूल मैं खेला करती थी,
तेरी चूड़ियों तेरे पायल की आवाज से डर लगता था.

लगता था तू आएगी बहुत  डाटेंगी और कान पकड़कर मुझे ले जाएगी,
माँ आज भी मुझे किसी दिन धूल धूल सा लगता है.

चूड़ियों के बीच तेरी गुस्से भरी आवाज सुनने का मन करता है,
मन करता है तू आ जाए बहुत डांटे और कान पकड़कर मुझे ले जाए.

जाना चाहती हूं  उस बचपन में फिर से जहां तेरी गोद में सोया करती थी,
जब काम में हो कोई मेरे मन का तुम बात-बात पर रोया करती थी.

जब तेरे बिना लोरियों  कहानियों यह पलके सोया नहीं करती थी,
माथे पर बिना तेरे स्पर्श के ये आंखें जगा नहीं करती थी.

अब और नहीं घिसने देना चाहती तेरे ही मुलायम हाथों को,
चाहती हूं पूरा करना तेरे सपनों में देखी हर बातों को.

खुश होगी माँ एक दिन तू भी,
जब लोग मुझे तेरी बेटी कहेंगे.

Title: माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry