मरहम घाव ढूंढ रहे हैं, पत्ते छांव ढूंढ रहे हैं,
मंजिलें थोड़ी दूर हैं, रास्ते पांव ढूंढ रहे हैं...
गुमराह करने वालों की भीड़ बहुत बड़ी है
वहां मत जाना वो चलने को बस दाव ढूंढ रहे हैं...
बेच देंगे वो सरकारें भी इक दिन
मिलने का सही भाव ढूंढ रहे हैं...
बेगुनाहों को बेजान करना आदत है इनकी
बस, मूंछों को देने के लिए झूठा ताव ढूंढ रहे
हैं...
जो दोस्त बने थे कभी,वो आज मेरे दुश्मन हैं,
चूड़ियां सारीं उसकी,मेरे नाम के दो कंगन हैं,
उस रहीस के लिए, हर एक मौसम है साबन,
यहां पर,ना ज़मीन,ना घर,ना कोई आंगन है,
तुम्हे है खोफ़,तो डालो कोई,नक़ाब चेहरे पर,
ना दिल तोड़ा, ना लूटा, मेरा बेदाग दामन है,