अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
Enjoy Every Movement of life!
अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
zindagi rahi taa fir mila ge
marn to bad kon yaad rakhda
खून टपकने लगा आंखो से
आंसुओ को सूखे जमाना हुआ
तुम्हारी तस्वीर ही बची थी पास मेरे
तम्हारा कैसे आना हुआ
क्यू हाल पूंछ मेरे जख्मों को कुरेद रहे हो तुम
मेरे जिस्मों में अब दर्द का ठिकाना हुआ
सलमान….दर्द ही लिखोगे क्या ता_उम्र
उससे पूछो तो इस दर पर क्यू आना हुआ
कलम….तू तो जनता है न मेरे हालात ….
तू बता कैसे हमारा गुजारा हुआ