अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
Enjoy Every Movement of life!
अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
ਜੀਹਦੇ ਲੱਗੀ ਓਹੀ ਜਾਣੇ, ਨੁਕਸਾਨ ਝੱਲ ਕੇ ਤਾਂ ਦੇਖ ।
ਕੱਲਾ ਤਾਂ ਵੈਸੇ ਹੀ ਚਮਕਦਾ
ਤੇਰਾ ਮੁੱਲ ਕੀ ਪੈਣਾ, ਪਥਰਾਂ ਚ ਰਲ਼ ਕੇ ਤਾਂ ਦੇਖ ।।
#sam
