अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
Enjoy Every Movement of life!
अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
मुस्कुराने की वजह न ढूंढो,
वरना ज़िंदगी युही कट जाएगी,
कभी बेवजह मुस्कुराकर तो देखों,
आपकी साथ ये जिंदगी भी मुस्कुरायेंगी…
