अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
Enjoy Every Movement of life!
अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
Iss prem ke chakkar me nah faso yaaro..
Yeh jindagi ko maut bana deti haii…
Khushiyan dekar kuch pal kii jindagii ko dard bana deti haii…
खुद पुकारेगी मंज़िल तो ठहर जाऊँगा
वरना खुद्दार मुसाफिर हूँ गुजर जाऊँगा🙃❤️