अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
Enjoy Every Movement of life!
अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो

Sab trah ki deewangi se wakif hain hum
Par maa jaisa chahne wala zmane mein koi nhi hai 😇
सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हैं हम
पर मां जैसा चाहने वाला जमाने में कोई नहीं है !!😇