अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो
बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो
बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही
मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो
किसान कविता
बूँद बूँद को तरसे जीवन,
बूँद से तड़पा हर किसान
बूँद नही हैं कही यहाँ पर
गद्दी चढ़े बैठे हैवान.
बूँद मिली तो हो वरदान
बूँद से तरसा हैं किसान
बूँद नही तो इस बादल में
देश का डूबा है अभिमान
बूँद से प्यासा हर किसान
बूँद सरकारों का फरमान
बूँद की राजनीति पर देखों
डूब रहा है हर इंसान.
देव चौधरी
ik pata tutta tahni to
jive me vakh hoi haani to
pate ne v holi holi suk jaana
me v ohde baajo ik din muk jaana
ਇੱਕ ਪੱਤਾ ਟੁੱਟਾ ਟਾਹਣੀ ਤੋ,
ਜਿਵੇ ਮੈਂ ਵੱਖ ਹੋਈ ਹਾਣੀ ਤੋਂ,☹
ਪੱਤੇ ਨੇ ਵੀ ਹੌਲੀ ਹੌਲੀ ਸੁੱਕ ਜਾਣਾ…
ਮੈਂ ਵੀ ਉਹਦੇ ਬਾਝੋ ਇੱਕ ਦਿਨ ਮੁੱਕ ਜਾਣਾ 😢