Keh na saki us kamle nu
kine me chahundi si
tasveer ohdi nu luk luk ke
nit seene laundi si
ਕਹਿ ਨਾ ਸਕਿ ਉਸ ਕਮਲੇ ਨੂੰ
ਕਿੰਨਾ ਮੈ ਚਾਹੁੰਦੀ ਸੀ_
ਤਸਵੀਰ ਓਹਦੀ ਨੂੰ ਲੁਕ ਲੁਕ ਕੇ
ਨਿੱਤ ਸੀਨੇ ਲਾਉਂਦੀ ਸੀ_
Keh na saki us kamle nu
kine me chahundi si
tasveer ohdi nu luk luk ke
nit seene laundi si
ਕਹਿ ਨਾ ਸਕਿ ਉਸ ਕਮਲੇ ਨੂੰ
ਕਿੰਨਾ ਮੈ ਚਾਹੁੰਦੀ ਸੀ_
ਤਸਵੀਰ ਓਹਦੀ ਨੂੰ ਲੁਕ ਲੁਕ ਕੇ
ਨਿੱਤ ਸੀਨੇ ਲਾਉਂਦੀ ਸੀ_
Dard likhan la denda ae
vishvaas dhoka pyaar ki hunda sab samjha dinda e
ਦਰਦ ਲਿਖ਼ਣ ਲਾ ਦੇਂਦਾ ਐਂ
ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਦੋਖਾ ਪਿਆਰ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਸਭ ਸਮਝਾ ਦਿੰਦਾ ਐਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
यह अधूरा इश्क कब पूरा होगा
होगा भी जा अधूरा रहेगा
ना तुम आए ना पैगाम आया
तुम्हरे पैगाम का कब तक
इंतजार रहेगा
कौन सी जगह है वोह
जहा पर वोह सो गया
ना जाने कौन सी वोह गालियां है
जिस शहर की गलियों में खो गया
हम गलियों मै देख आए
ना गलियों मै वोह मिला
हम बात उसकी कर रहे
हमें छोड़ कर जो गया
नाजने कौन सी वोह गालियां है
जिस शहर की गलियों में खो गया
हम पहचान बताते हैं उसकी
सफेद रंग और काले घने बाल है।
कहां रहते हैं वोह कोनसे गांव और शहर में
एकेले थे जा कोई नाल है।
काले रंग की पेंट और कमीज़ पहनते है।
एक हाथ मै डायरी और एक हाथ
मे कलम पकड़ कर रखते हैं।
उनकी चाहत सबसे ज्यादा डायरी से
और वोह डायरी को
सिने से जकड़ कर रखते है।
उनका नाम है हर्ष
जो शायरी करते थे
अब तो नाम उनका गुमनाम सा हो गया
ना जाने कौन सी वोह गालियां है
जिस शहर की गलियों में खो गया।