khaamosh rah… tanaha baith… yaad kar us ko,
toone ishq kia hai…. gunaah chhota nahin hai tera…
खामोश रह… तनहा बैठ… याद कर उस को,
तूने इश्क़ किआ है…. गुनाह छोटा नहीं है तेरा…
khaamosh rah… tanaha baith… yaad kar us ko,
toone ishq kia hai…. gunaah chhota nahin hai tera…
खामोश रह… तनहा बैठ… याद कर उस को,
तूने इश्क़ किआ है…. गुनाह छोटा नहीं है तेरा…
“थोड़ा थक सा जाता हूं अब मै…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…
मैंने चलना ही छोड़ दिया है।
फासलें अक्सर रिश्तों में…
अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने..
अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है।
हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ…
खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने…
अपनापन ही छोड़ दिया है।
याद तो करता हूँ मैं सभी को… और परवाह भी करता हूँ सब की, पर कितनी करता हूँ… बस, बताना छोड़ दिया है।।”
रूह ही रूह को जानती है
रूह की रूह से प्रीत
रूह की रूहदारी में
रूह है रूह की मीत
रूह झूमे❤️
रूह बाबरी
रूह की अद्भुत रीत❤️
#मन
Mann✍️