बेअसर हो रही सब दुआए मेरी
जिंदगी जाने क्या सिलसिला दिखा रही है ,
जिसके लिए मांगी खुदा से खुशिया
वो ही धीरे-धीरे दिल को जला रही है।
इंतज़ार किया घंटो उसका
क्या मालूम था वो किसी ओर से मिलके आ रही है ,
मिलने के बहाने ढूंढती थी जो बार बार
यार वो लड्की आँख मिलने से घबरा रहि रही है ।
Mana ki zindagi imtihaan leti hai kabhi khushiyan to kabhi gam deti hai kon tai krega manzil takk ka safar apna musafir bhi pehchan leti hai 🍂
माना कि ज़िंदगी इम्तिहान लेती है कभी खुशियां तो कभी गम देती है कौन तय करेगा मंज़िल तक का सफर अपना मुसाफिर भी पहचान लेती है 🍂