खुद पर रख भरोसा के, रब भी तुझे गैर करेगा.. अपनों की छोड़, तू भी खुद से बैर करेगा... सांस थामकर कर, थोड़े और बुलंद हौंसले कर.. जब निगाहें होगी ज़माने में, रब भी तेरी खैर करेगा...
Enjoy Every Movement of life!
खुद पर रख भरोसा के, रब भी तुझे गैर करेगा.. अपनों की छोड़, तू भी खुद से बैर करेगा... सांस थामकर कर, थोड़े और बुलंद हौंसले कर.. जब निगाहें होगी ज़माने में, रब भी तेरी खैर करेगा...
मोहब्बत की ये इप्तिदा चाहता है,
मेरा इश्क तुझसे वफ़ा चाहता है,
ये आँखों के दरिया नशीले-नशीले,
इन आँखों में दिल डूबना चाहता है।
